स्मृति में वेद,हृदय में :ज्योतिष,भारत का बाल ऋषि अरिपिराला योगानंद शास्त्री

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जरा कल्पना कीजिए एक ग्यारह साल का बच्चा, जिसके हाथ में स्कूल बैग की जगह पंचांग है, कंधे पर जनेऊ है, और मुंह से निकलते हैं संस्कृत के कठिन सूत्र जो सैकड़ों पंडितों के लिए भी दुर्बोध हैं। वह बच्चा जब यज्ञ-वेदी पर खड़ा होता है, तो अग्नि भी जैसे श्रद्धा से झुक जाती है। यह कोई पौराणिक कथा नहीं, यह आज के भारत की सच्ची घटना है। नाम है अरिपिराला योगानंद शास्त्री। लोग उन्हें प्यार से “डॉ. योगानंद” कहते हैं, और यह “डॉक्टर” कोई खिलौना उपाधि नहीं दो मानद डॉक्टरेट धारक हैं ये बाल-ब्रह्मर्षि।
आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में जब यह बालक जन्मा, तो घर में जैसे कोई प्राचीन ऋषि फिर लौट आया हो। पिता डॉ. अरिपिराला कल्याण शास्त्री बताते हैं-“पांच साल की उम्र में योगानंद ने मुझसे पहला सवाल पूछा था,‘पिताजी, लग्नेश अगर नीच का हो तो क्या उपाय है?’ मैंने हंसकर टाल दिया। दूसरे दिन उसने खुद ‘फलदीपिका’ खोलकर उपाय बता दिया।” तब से लेकर आज तक, योगानंद ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। स्कूल में गणित की कॉपी में जहां बच्चे 2+2 लिखते हैं, वहां योगानंद दशम भाव में गुरु-चांडाल योग की व्याख्या लिखते हैं।
खैर यह एक ऐसी बाल प्रतिभा हैं जिन्होंने मात्र 10-11 वर्ष की आयु में ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और वैदिक कर्मकांडों में अपनी अद्भुत क्षमता से दुनिया को चकित कर दिया है। आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले का निवासी यह बालक न केवल कुंडली पढ़ता हैं, बल्कि यज्ञ और अन्य वैदिक अनुष्ठानों का भी निरीक्षण करता हैं। यह बालक न केवल प्रतिभा की मिसाल है, बल्कि यह दर्शाता है कि उम्र उसके लिए केवल एक संख्या है।
अरिपिराला योगानंद शास्त्री का जन्म आंध्र प्रदेश के गुंटूर में एक सामान्य परिवार में हुआ। उनके पिता, डॉ. अरिपिराला कल्याण शास्त्री, एक सम्मानित व्यक्ति हैं जिन्होंने योगानंद की प्रतिभा को पहचाना और उसे निखारने में सहयोग किया। मात्र पांच वर्ष की आयु में योगानंद ने कुंडली के आधार पर भविष्यवाणी की जटिलताओं में रुचि दिखाई। उनके पिता के अनुसार, “योगानंद ने बचपन से ही ज्योतिष के रहस्यों को समझने की कोशिश की। वह घंटों पुराने ग्रंथों को पढ़ते और सवाल पूछते।” यह रुचि धीरे-धीरे इतनी गहरी हो गई कि योगानंद ने न केवल ज्योतिष सीखा, बल्कि वास्तु शास्त्र और वैदिक यज्ञों में भी महारथ हासिल कर ली। स्कूली शिक्षा के साथ-साथ, योगानंद ने अपनी पढ़ाई में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। कक्षा पांच के छात्र होने के बावजूद, वे ज्योतिषीय गणनाओं और वैदिक मंत्रों का सटीक उच्चारण करते हैं, जो वयस्कों के लिए भी चुनौतीपूर्ण होता है।
योगानंद शास्त्री की प्रतिभा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल चुकी है। 2022 में, मात्र 10 वर्ष की आयु में, उन्हें दो मानद डॉक्टरेट डिग्रियां प्रदान की गईं, एक ज्योतिष में और दूसरी वास्तु शास्त्र में। यह सम्मान गोवा में आयोजित एक विशेष समारोह में दिया गया,जहां 11 वर्षीय योगानंद को ‘ज्योतिष में असाधारण ज्ञान’ के लिए सम्मानित किया गया। 2024 में, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष श्री राम निवास गोयल द्वारा ‘भारत सम्मान निधि पुरस्कार’ से नवाजा गया। इसके अलावा, इन्हें नेशनल ग्लोरियस अवॉर्ड (माननीय जस्टिस डॉ. के.जी. बालाकृष्णन द्वारा) और ‘यंग रिसर्चर इन एस्ट्रोलॉजी अवॉर्ड’ ( श्री सुरेश प्रभु द्वारा) जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। ये सम्मान न केवल उनकी विद्वता को प्रमाणित करते हैं, बल्कि युवा पीढ़ी को प्रेरित भी करते हैं। योगानंद की एक अन्य उपलब्धि है उनका यूट्यूब चैनल ‘संस्कृति प्रोडक्शंस’। इस चैनल के माध्यम से वे लोगों की आध्यात्मिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करते हैं, पौराणिक कथाओं की व्याख्या करते हैं और वैदिक ज्ञान को सरल भाषा में समझाते हैं। चैनल पर उनके वीडियो लाखों लोगों तक पहुंच चुके हैं, जो उनकी पहुंच की व्यापकता दर्शाते हैं।
डॉ. अरिपिराला योगानंद शास्त्री का योगदान केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक भी है। वे वैदिक परंपराओं को आधुनिक संदर्भ में जोड़ते हैं, जिससे युवा वर्ग प्राचीन ज्ञान की ओर आकर्षित होता है। उनके यज्ञ और कुंडली विश्लेषण सत्रों में लोग दूर-दूर से आते हैं, और वे हमेशा जोर देते हैं कि “ज्योतिष विज्ञान है, न कि अंधविश्वास।” इसके अलावा, वे पौराणिक ग्रंथों का अध्ययन करते रहते हैं और अपने माता-पिता से कथाएं सुनना पसंद करते हैं। यह बालक स्कूल की किताबों के साथ-साथ वेदों को भी उतनी ही आसानी से पढ़ लेता है, वह निश्चित रूप से भविष्य का सितारा है।
बहरहाल वेद आज भी जीवित हैं,इस 11 साल के बच्चे की स्मृति में, उसकी वाणी में, उसके कर्म में। जय हो ऐसे बाल-ऋषि की। जय हो उस भारत की, जो अभी भी अपने बच्चों में भगवान को देखता है।ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। ॐ नमः बालयोगानंदाय।

(संजय अमान -विभूति फीचर्स)