आस्था, संस्कृति और सिनेमा का पावन संगम
हल्द्वानी।
अपनी भव्य शुरुआत के बाद हिंदी फीचर फिल्म ‘विद्या – सपनों की उड़ान’ की सफलता को लेकर कलाकारों की टीम शुक्रवार को श्रद्धा के साथ माँ अवंतिका दरबार पहुँची। उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध लोक कलाकारों और फाउन्डर टीम ने माँ अवंतिका के समक्ष सिर झुकाकर फ़िल्म की सफलता और समाज में शिक्षा की लौ जलाने के संकल्प के लिए आशीर्वाद माँगा।
दरबार परिसर में पूजा-अर्चना के बाद कलाकारों ने कहा कि—
“यह मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि यहाँ की शांति आत्मा को स्पर्श करती है। दर्शन कर हम धन्य महसूस कर रहे हैं।”
फिल्म के निर्देशक विक्की योगी ने श्रद्धा भाव से कहा—
“सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि एक सोच है… समाज को दिशा देने की ताकत है। ‘विद्या’ उसी सोच की आत्मा है।”
इस अवसर पर उत्तराखण्ड की प्रसिद्ध लोकनृत्यांगना भुवनेश्वरी जोशी व समाज सेविका सरोज बिष्ट पूनम चंद ने भी दर्शन किए और कहा—
“माँ अवंतिका की ऊर्जा अलौकिक है। यहाँ आकर लगता है जैसे मन शुद्ध हो गया हो। अब हम बार–बार आएंगे।”
कलाकारों ने सामूहिक रूप से आरती में भाग लिया और ‘विद्या—सपनों की उड़ान’ को समाज में बेटियों की शिक्षा के संदेश को सफलतापूर्वक पहुँचाने की प्रार्थना की।
कलाकारों ने कहा कि फ़िल्म केवल एक कहानी नहीं, बल्कि उन बेटियों की आवाज़ है जो संघर्षों के बावजूद अपने सपनों को उड़ान देना चाहती हैं।
मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भी टीम को शुभकामनाएँ दीं और कहा कि इस तरह की फिल्में समाज को नई दिशा देती हैं।
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