हुसैनीवाला के पार से प्राप्त सूचनाओं के अनुसार पंजाब के सीमावर्ती जिलों के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी आई.एस.आई ने आतंकवादी गतिविधियां तेज करते हुए अब आतंकवादियों को ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग देनी शुरु कर दी है। ऐसा लगता है कि पाकिस्तान खुफिया एजेंसी आई.एस.आई आतंकी प्रशिक्षण शिविरों में भारत के खिलाफ ड्रोन फोर्स तैयार करने में जुटी हुई है। सूत्रों से पता चला है कि इसके लिए बकायदा पाकिस्तान की वायु सेना के बड़े-बड़े अधिकारियों के साथ ब्रिगेडियर अहमद राशिद और सुल्तान अहमद आतंकवादियों को ड्रोन उड़ाने से लेकर उससे हमले करने तक का प्रशिक्षण दे रहे है। चीन में बने यह आधुनिक ड्रोन आतंकवादियों और तस्करों का सबसे बढ़िया हथियार समझे जा रहे है। इनसे बिना किसी परेशानी के भारतीय सीमा में ड्रोन से हथियार और घातक शस्त्रों की सप्लाई की जा रही है। नशीले पदार्थों से लदे ड्रोन भारत में लगातार भेजे जा रहे है।
सूत्रों के अनुसार सीमावर्ती क्षेत्र अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का और गुरदासपुर में सीमा सुरक्षा बलों ने भी अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर अपनी गतिविधियां बढ़ाते हुए अपने आप को सक्रिय और चौकस कर रखा है। उधर, पाकिस्तान के अधिकारी सुबह से शाम तक शिविरों में जाकर आतंकवादियों को ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण दे रहे है। शिविरों में अधिकारी आतंकवादियों को बता रहे है कि ड्रोन कितनी ऊंचाई तक उड़ाना होता है, ताकि ड्रोन दुश्मनों के रडार पर ना आ सके। किस ड्रोन में कितना ड्रग,असला और विस्फोट भेजना है यह भी वे आतंकवादियों को सिखा रहे हैं। सूत्रों से पता चला है कि पंजाब में जो ड्रोन उड़ाए जा रहे हैं उन्हें पाकिस्तान की सीमा सुरक्षा बल और तस्कर ऑपरेट करते हैं, जिन्हें आई.एस.आई से ट्रेनिंग मिली है। यह ड्रोन बहुत ही आधुनिक ढंग से बनाए जाते हैं जो बड़ी आसानी से 10-15 किलो मीटर उड़ान भर सकते है। उड़ान भरने से पहले इसके संचालक भारत में बैठे तस्करों से संपर्क करते है और तय स्थान पर ड्रोन से शस्त्रों और नशीले पदार्थों की खेपें उतारते है। चीन से बने ड्रोनों का उपयोग जहां पाकिस्तानी सेना कर रही है, वहीं आतंकी भी चीनी ड्रोन का प्रयोग कर रहे है। आतंकी कार्रवाईयों में यह ड्रोन पाकिस्तानी सेना, वायु सेना और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आई.एस.आई पहुंचा रही है।
1990 के दशक से पूर्व जब भारत-पाक सीमा पर कंटीली तार नहीं लगी थी, तब भी पाकिस्तान से अवैध शस्त्रों ओर नशीले पदार्थों की तस्करी होती थी। कंटीली बाढ़ लगने के बाद भूमिगत सुरंगों से तस्करी होने लगी थी और अब ड्रोनों के जरिए यह तस्करी हो रही है। सीमा सुरक्षा बल के एक अधिकारी ने बताया कि उच्च तकनीक प्राप्त ड्रोन 500 से 1300 मीटर तक उड़ रहे है। सर्दियों में धुंध गहरी होने के कारण इनकी विजिबिल्टी कम हो जाएगी। 500 मीटर से उड़ते ड्रोन को नीचे गिराना मुश्किल होता है। पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी आई.एस.आई की निगरानी में जो ड्रोन उड़ाए जाते है, वे सामान फैंककर शीघ्रता से वापिस लौट जाते हैं। जिसके कारण पंजाब के सीमावर्ती जिलों में लगायी गई एंटी ड्रोन प्रणाली के रडार में वह नहीं आ पाते। उधर, बड़े अधिकारियों का कहना है कि एंटी ड्रोन प्रणाली तभी सफल होगी जब तकनीक, हमारी गुप्तचर एजेंसियां, रैपिडरिस्पांस टीम तीनों मिलजुलकर काम करेंगी। पाकिस्तान का नेटवर्क इस समय पहले से ज्यादा मजबूत एवं आधुनिक है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (पाकिस्तान रेंजर) प्राय: ड्रोन को रात्रि में ही उतारती है।
सारी दुनिया मानती है कि पाकिस्तान टैरर फैक्ट्री है। इस समय सीमा पर पाकिस्तान की गतिविधियों को देखकर लगता है कि वह पंजाब के सीमावर्ती जिलों में ड्रोन के जरिए किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सकता है। देश की सुरक्षा एजेंसियों ने ऐसे कई इनपुट दिए है। हमारी सुरक्षा एजेंसियां एक दम चौकस है।
ऐसा देखा गया है कि कई बार ड्रोनों पर ज्यादा सामान लाद दिया जाता है और वह भारी सामान के कारण बीच में ही नीचे गिर जाते है। जिन्हें स्थानीय असामाजिक तत्व बटोर लेते हैं। मानव रहित यह ड्रोन तस्करों के लिए भी वरदान साबित हो रहे है। तस्कर अब बिना जान जोखिम में डाले नशीले पदार्थों की तस्करी करने में लगे हुए है। इससे स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान के इरादे नेक नहीं है। वह भारतीय भूमि को पुन:अशांत करने के लिए लगा हुआ है। अभी तक पंजाब में अधिकतर ऐसे लोगों के पास शस्त्र और नशीले पदार्थों की खेपें पकड़ी गई है, जो कंटीली तार के पास खेतीबाड़ी करने जाते है। सरहद पर बने गेट तस्करों के लिए गेट वे बन रहे है। भारत में ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो रुपए कमाने के लिए देश की सुरक्षा और अस्मिता से खेलने के लिए सदा तैयार रहते है। पिछले दिनों सरहदी क्षेत्रों में आई बाढ़ के दिनों में कई तैराक युवकों ने पाकिस्तान से लाखों की तस्करी की, इनमें कुछ सुरक्षा एजेंसियों के हाथों पकड़े भी गए। पाकिस्तानी ड्रोन देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बने हुए है। चाईना मेड ड्रोन पाकिस्तान के मार्केट में सरेआम बिक रहे है। वहीं पाकिस्तान में बैठे एक बड़े राजनीतिक दल ने स्वीकार किया है कि मुनीर अहमद पाकिस्तानी सेना के अध्यक्ष खुद पाकिस्तान से उड़ने वाले ड्रोनों की निगरानी कर रहे है और ड्रोन हमलों का चार्ज मुनीर ने स्वयं संभाला हुआ है। पाकिस्तान में जिस प्रकार अराजकता फैल रही है, उससे पाकिस्तान की सरकारें घबराई हुई है। पाकिस्तान में अराजकता का वातावरण उत्पन्न हो रहा है। इसी कारण पाकिस्तानी सेना भारत में भी अराजकता फैलाने की कोशिशें कर रही है।
भारतीय सीमा में एक-एक नहीं, बल्कि चार-चार ड्रोन प्रवेश कर रहे है। पिछले एक सप्ताह में 20 से अधिक ड्रोन हिंदुस्तान की सीमा में घुसे है। फिरोजपुर के सीमावर्ती क्षेत्र कामल वाला में एक ड्रोन मिला, वहीं गांव राजा राए के पास खेतों में छिपाकर रखी दो पिस्तोलें बरामद की गई। अमृतसर के पड़ाही गांव में बीएसएफ ने फायरिंग करके ड्रोन को खदेड़ दिया। तलाशी के बाद 1 किलो 604 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। ममदोट से 8.250 किलो ग्राम हेरोइन बरामद हुई, तरनतान में भी 3 किलो हेरोइन बरामद की गई है। गांव जलालवाल से एक नाई को काबू किया गया है, जिसके पास से सवा चार किलो हेरोइन बरामद हुई है। ऐसा लगता है कि पाकिस्तान भारतीय पंजाब की नौजवान पीढ़ी को नशेड़ी बनाने पर तुला हुआ है।
पिछले 90 दिनों में पाकिस्तान ने पंजाब सीमा पर 290 ड्रोन भेजे, जिसमें सिर्फ 7 गिराए गए और हाथ में आए सिर्फ तीन। सूत्रों से प्राप्त सूचना के अनुसार पंजाब सरकार को 18.30 करोड़ की राशि से तीन सीमावर्ती जिलों में एंटी ड्रोन प्रणाली लगाने के बावजूद इतनी सफलता नहीं मिल रही है। भारत में यदि इसी प्रकार पाकिस्तानी ड्रोन उड़ते रहे तो यह बहुत बड़ी चिंता की बात है। पाकिस्तान में बैठा सिकंदर इस खेल का असली खिलाड़ी माना जा रहा है। वह हिंद-पाक सीमा पर बसे नौजवानों को छोटे-मोटे लालच देकर तस्करी के धंधे में फंसा रहा है।
(सुभाष आनंद-विनायक फीचर्स)
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