लालकुआं।
भाकपा (माले) के केंद्रीय कंट्रोल कमीशन के चेयरमैन कामरेड राजा बहुगुणा को आज बिंदुखत्ता में भावभीनी विदाई दी गई। पार्टी कार्यालय से निकलने वाली अंतिम यात्रा ने पूरे काररोड बाजार में रैली का रूप ले लिया, जहाँ सड़कें नारों से गूँज उठीं—
“कामरेड राजा बहुगुणा अमर रहें!”
“लाल सलाम!”
“संघर्ष जारी रहेगा!”
भीड़ नारे लगाते हुए उनके संघर्षों, विचारों और अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प दोहराती रही।
राजनीतिक और सामाजिक जीवन पर भावुक स्मरण
अंतिम यात्रा से पूर्व पार्टी कार्यालय में एक संक्षिप्त श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई, जिसमें उनके योगदान, श्रमिक आंदोलनों में भूमिका, सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक अधिकारों और जन-संघर्षों में उनकी अग्रणी सोच को याद किया गया। सभा के अंत में दो मिनट का मौन रखकर कामरेड को श्रद्धांजलि दी गई।
इसके बाद हजारों लोग जुलूस के रूप में रानीबाग विद्युत शव दाह गृह पहुंचे, जहाँ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
प्रदेश के प्रमुख सामाजिक, राजनीतिक और जनआंदोलन से जुड़े लोग रहे उपस्थित इस अवसर पर बड़ी संख्या में नेता, समाजसेवी, बुद्धिजीवी, छात्र संगठन, महिला संगठन, श्रमिक संगठन एवं सांस्कृतिक मोर्चे से जुड़े लोग उपस्थित थे।
उपस्थित लोगों में
भाकपा माले व अन्य संगठन प्रतिनिधि:
संजय शर्मा, राजेन्द्र प्रथोली, इंद्रेश मैखुरी, गिरिजा पाठक, बहादुर सिंह जंगी, पीसी तिवारी, प्रभात ध्यानी, कमला पंत, विद्या रजवार, केके बोरा, आनंद सिंह नेगी, गोविंद कफलिया, अतुल सती, अंकित उछोली, अफरोज आलम, ललित मटियाली, विमला रौथाण, किशन बघरी, विजय, ललित जोशी, रुदल प्रसाद, विपिन शुक्ला, आशुतोष उपाध्याय, अमनदीप कौर, बची सिंह बिष्ट, आनंद सिंह सिजवाली।
बौद्धिक एवं सामाजिक क्षेत्र:
नंद नंदन पांडे, जहूर आलम, इतिहासकार शेखर पाठक, नवेंदु मठपाल, विवेक पांडे, कन्नू जोशी, नमिता पाठक, साहित्यकार अशोक पांडे, प्रो. गिरिजा पांडे, प्रो. उमा भट्ट।
पूर्व जन प्रतिनिधि एवं राजनीतिक साथी:
पूर्व विधायक नारायण सिंह जंतवाल, अशोक डालाकोटी, मासूफ अली, राजेंद्र सिंह राजा, जगदेव सिंह, मदन मोहन चमोली।
कानूनी, पत्रकारिता व सामाजिक क्षेत्र:
एडवोकेट कैलाश जोशी, त्रिभुवन फर्तयाल, जगमोहन रौतेला, ओपी पांडे, चंद्रशेखर जोशी, चंद्रशेखर भट्ट, देवेंद्र रौतेला।
अन्य शामिल लोग:
संजय बघरवाल, दिनेश उपाध्याय, दिनेश पलड़िया गिरधर बम, मोहन मटियाली, चन्दन, महेश, भगवती पंत, रोबिन, कमला कुंजवाल, रीता कश्यप, पुष्कर, भुवन जोशी, नैन सिंह कोरंगा, यतीश पंत, प्रकाश फुलोरिया, अनीता अन्ना, अनिल रजवार, पुष्कर दुबड़िया, श्याम सिंह रावत, भूपति रंजन, सुनील यादव, बसंती पाठक, प्रदीप पांडे, रूपेश कुमार, सुरेंद्र रावत, शिवदेव सिंह, बिंदु गुप्ता, पुष्कर दानू, गुरदयाल मेहरा सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
श्रद्धांजलि देने पहुंचे राजनीतिक, सामाजिक, किसान, छात्र संगठनों के प्रमुख नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।सभी वक्ताओं ने कहा कि—
“कामरेड राजा बहुगुणा सिर्फ एक नेता नहीं, विचार थे — और विचार कभी नहीं मरते।”
विचारधारा की लौ जलती रहेगी: परिवार और जनसंगठन एकजुट
कामरेड के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में उनके परिवारजन पत्नी रेखा बहुगुणा, भाई राजीव बहुगुणा, पुत्री संयुक्ता बहुगुणा सहित कई परिजन मौजूद रहे। अंतिम यात्रा में जनप्रतिनिधि, पत्रकार, लेखक, छात्र, मजदूर, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिकों की भारी मौजूदगी इस बात का प्रमाण थी कि राजा बहुगुणा सिर्फ राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं बल्कि समाज की आवाज़ थे।
संकल्प वही — संघर्ष वही
कामरेड राजा बहुगुणा की अंतिम यात्रा के नारे, उनके जीवन की दिशा और विचारों की गूंज थे —
“कामरेड जाते हैं, लेकिन आंदोलन नहीं रुकता।”
“हम उनके सपनों को मंजिल तक पहुँचाएंगे।”
उनकी विचारधारा को आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हुए यात्रा रानीबाग में पूर्ण हुई, जहाँ क्रांतिकारी नारों के बीच उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
यह सिर्फ विदाई नहीं थी — एक युग, एक संघर्ष और एक विचार को सलाम था।
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