देवीधुरा का रहस्य: उस रात जब नरबलि का नियम बदल गया…
बहुत पुरानी बात है, कुमाऊं के घने बांज-बुरांश के वनों से घिरे देवीधुरा में आतंक का साया गहराया हुआ था। आस-पास के पर्वतीय क्षेत्रों में राक्षसों का ऐसा उपद्रव….
बहुत पुरानी बात है, कुमाऊं के घने बांज-बुरांश के वनों से घिरे देवीधुरा में आतंक का साया गहराया हुआ था। आस-पास के पर्वतीय क्षेत्रों में राक्षसों का ऐसा उपद्रव….
रक्षाबंधन यानी रक्षा का संकल्प। एक धागा जिसे बहनें भाई की कलाई पर बांधती हैं। इसका अर्थ है कि भाई उसकी सुरक्षा करेगा। पर राखी का यह धागा सिर्फ….
भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराना संबंध केवल सीमा का नहीं, बल्कि संस्कृति, परिवार, व्यापार और विश्वास का संबंध है। यही खुली और सहज सीमा अब विदेशी माल….
आज जिस रफ़्तार से कृत्रिम मेधा हमारे जीवन में प्रवेश कर रही है, उसे देखकर कभी-कभी लगता है जैसे हम किसी ऐसी नदी में तैर रहे हैं जिसका रुख….
भविष्य में शहरों को अब समुद्र की लहरों पर बसाया जाएगा। जापान के वैज्ञानिक ऐसे तैरते हुए प्लेटफार्म विकसित कर रहे हैं, जो कई किलोमीटर लंबे और चौड़े होंगे।….
आज भी जीवंत है सदियों पुरानी बिहुला-विषहरी की लोकगाथा भारत की वाचिक परंपराओं का अपना विशिष्ट महत्व है। एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक लोक-कंठ के माध्यम से पहुंचने….
उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद में विजयपुर की सुरम्य वादियों, हिमाच्छादित पर्वत श्रृंखलाओं और देवदार-बांज के सघन वनों के मध्य एक ऐसा अलौकिक धाम स्थित है, जहां आज भी नागलोक की….
स्थान: डोल (अल्मोड़ा) देवभूमि उत्तराखण्ड के कुमाऊँ अंचल स्थित जनपद अल्मोड़ा का सुरम्य डोल क्षेत्र केवल अपनी प्राकृतिक नीरवता के लिए ही नहीं, बल्कि एक ऐसे रहस्यमयी आध्यात्मिक विस्मय के….
देवभूमि उत्तराखण्ड केवल अपनी नैसर्गिक सुरम्यता के लिए ही नहीं, बल्कि समूचे विश्व में अपनी गूढ़ आध्यात्मिक चेतना के लिए विख्यात है। यहाँ के गिरि-शिखरों और सघन वनों में विचरण….
(सुरेन्द्र शर्मा-विभूति फीचर्स) “तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं, त्याग, बलिदान और गौरव का प्रतीक है।” भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा प्रत्येक भारतीय के….