चंद घंटों में ऐसा क्या हुआ कि हमेशा के लिए ख़ामोश हो गई एक हंसती-मुस्कुराती ज़िंदगी? लालकुआं पर टूटा असहनीय वज्रपात
लालकुआं। नियति के क्रूर और अप्रत्याशित फैसले ने आज भोर होते-होते पूरे क्षेत्र को गहरे आघात और आंसुओं में डुबो दिया। जनसेवा की मुखर आवाज़ और युवा व्यापारिक चेतना….



