सत्य साधक गुरुजी पहुंचें अवंतिका मंदिर माँ से की यह प्रार्थना

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लालकुआँ/ सत्य साधक विजेन्द्र पाण्डे गुरुजी ने अवंतिका मंदिर लालकुआँ पहुंचकर लोक मंगल की कामना के लिए माँ अवंतिका के चरणों में आराधना के श्रद्धापुष्प अर्पित किये इस अवसर पर उनके साथ वरिष्ठ समाज सेवी हेमवती नन्दन दुर्गापाल भी मौजूद रहे
यहाँ दर्शन को पहुचे सत्य साधक श्री गुरुजी ने कहा कि माँ अवंतिका का यह स्थल अलौकिक शान्ति का केन्द्र है उन्होंने मंदिर परिसर में रख-रखाव व विकास कार्यो पर भी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मन्दिर से जुड़ी पुरानी यादें साझा की
उन्होंने कहा कि वर्षो पूर्व जब वे दीपावली से पूर्व दूनागिरी पर्वत पर 36 दिन की माँ बगलामुखी की साधना हेतु जा रहे थे तो कुछ पल यहां रुके तो स्थानीय भक्तों ने उन्हें जानकारी दी कि धर्म कांटे से लेकर मंदिर के आसपास के बीच हर वर्ष दीपावली के आसपास भीषण दुर्घटनाएं होती है तब उन्होंने माँ से प्रार्थना की कि इस वर्ष कोई दुर्घटना ना हो साधना की वापसी के बाद वे हवन करेंगे उन्होंने बताया माँ ने उनकी पुकार सुनी और उस वर्ष से लेकर पाँच वर्ष तक इस क्षेत्र में कोई दुर्घटना नही हुई उन्होंने कहा यदि इस भूमि में हवन होते रहे तो सभी का कल्याण होते रहेगा

उन्होंने कहा अपने व लोक कल्याण के लिए,परलोक के कल्याण आत्म कल्याण के लिए, कल्याण के देवता भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए माँ बगलामुखी की साधना महाकल्याण का परम मार्ग है। इनकी भक्ति जीवन में उमंग का संचार करती है। इनका ध्यान मनोवांछित फल को प्रदान करता है। इनकी स्तुति मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। कुल मिलाकर इनकी महिमा का वर्णन अवर्णनीय है। उसे कोई भी शब्दों में नहीं समेट सकता है। फिर भी जो कोई प्राणी अपने आराधना के श्रद्धा पुष्प माँ के चरणों में अर्पित करता है, शब्दों की सीढ़ी बनाकर माँ की स्तुति करता है उस पर माता सदा कृपालु रहती है। दस महाविद्याओं में माँ बगलामुखी परम सौभाग्य को प्रदान करने वाली है। इनकी भक्ति के प्रभाव से अन्य महाविद्याओं की कृपा व्यक्ति पर स्वतः ही आ जाती है क्योंकि सभी माँ के रूप हैं इसलिए ये सर्वस्वरूपा है। और माँ अवंतिका के भक्तों पर माँ सदैव कृपालु रहती है

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