पर्दे के पीछे किसका ‘खेल’? बिंदुखत्ता में बाहरी दखल से भड़का जनाक्रोश, क्या आर-पार की लड़ाई में एकजुट होंगे दो बड़े आंदोलन?

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लालकुआं। बिंदुखत्ता को वन अधिकार कानून के तहत राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर 15 अगस्त से पदयात्रा और 27 सितंबर की महारैली के बाद 5 अक्टूबर से तहसील परिसर में जारी अनिश्चितकालीन धरने के छठे दिन इंद्रानगर द्वितीय के ग्रामीण महेश फुलारा के नेतृत्व में धरने पर बैठे। वक्ताओं ने गीत-संगीत और संबोधन के माध्यम से राजस्व ग्राम की मांग दोहराई तथा तहसीलदार लालकुआं के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।

इस दौरान कांग्रेस नेता हरीश सुयाल की पहल पर इंडिया गठबंधन के क्रमिक अनशन और वन अधिकार संगठन के अनिश्चितकालीन धरने को एक साथ करने के प्रस्ताव पर दोनों पक्षों के शीघ्र बैठकर वार्ता करने पर सहमति बनी।

वन अधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश भट्ट ने कहा कि बिंदुखत्ता में पंचायत का अधिकार नहीं है। ऐसे में 32 ग्रामसभाओं द्वारा प्रशासन की देखरेख में वन अधिकार समिति निर्वाचित की गई हैं, जो विभागीय अधिकारियों के साथ पेंशन स्वीकृति, परिवार रजिस्टर सहित अनेक कार्यों में पंचायत प्रतिनिधियों के विकल्प के रूप में कार्य कर रही हैं। इसके बावजूद बिंदुखत्ता में आयोजित श्रमिक कैंपों में वन अधिकार समितियों को आमंत्रित नहीं किया जा रहा है। एक पार्टी विशेष के बाहरी नेताओं द्वारा सरकारी धन से खरीदी गई सामग्री केवल अपने कार्यकर्ताओं को वितरित कर इसे चुनावी प्रचार का माध्यम बनाया जा रहा है, जबकि वास्तविक मजदूर व्यक्तियों को न तो सामग्री मिल रही है और न ही उनके कार्ड बनाए गए हैं।
भट्ट ने कहा कि निर्वाचित सांसद-विधायक सरकारी योजनाओं के कार्यक्रमों में शामिल हों, तो संगठन को कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन बिंदुखत्ता में बाहरी लोगों के हस्तक्षेप का विरोध किया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि इस संबंध में सोमवार को जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया जाएगा। यदि जिलाधिकारी ने मामले का संज्ञान लेकर सभी पात्र व्यक्तियों को सामग्री वितरित नहीं करवाई, तो वन अधिकार समिति पेंशन संबंधी अन्य कार्य भी नहीं करेगी। जिलाधिकारी चाहें तो ये कार्य भी पार्टी विशेष के कार्यकर्ताओं से करवा सकते हैं। उन्होंने मांग की कि श्रमिक कैंपों में सभी पात्र व्यक्तियों को निष्पक्षता से सामग्री वितरित करने हेतु सभी 32 गांवों में 32 कैम्प लगाएं जाएं तथा बिंदुखत्ता में प्रत्येक सरकारी गतिविधि की सूचना देकर वन अधिकार समितियों को आमंत्रित किया जाए। साथ ही, सरकारी योजनाओं के वितरण में बाहरी राजनीतिक नेताओं के अनावश्यक हस्तक्षेप पर रोक लगाई जाए।

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आज धरना स्थल पर वनाधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट समिति के अध्यक्ष अर्जुन नाथ गोस्वामी पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष खिलाफ सिंह दानू कैप्टन इंद्र सिंह पनेरी, इंदिरा नगर हाथीखाल के संयोजक महेश चंद्र फुलारा कैप्टन खुशाल सिंह कोश्यारी भरत नेगी दीपक जोशी भूपेश जोशी, कविराज धामी, नवीन जोशी, दीपक पाठक, जीवन पांडे, ममता बिष्ट संध्या डालाकोटी, गोविंद गिरी, दौलत सिंह कोरंगा, हरीश सुयाल पूरन लोहनी, बिशन सिंह पपोला, मोहन राम, धन गिरी गोस्वामी, पार्वती देवी भट्ट, गंगा देवी सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति रही।