शोध और पत्रकारिता में उनके योगदान को किया याद
देहरादून, 23 अक्टूबर, 2026। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में शोधार्थी, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता दीवान नगरकोटी पर केंद्रित स्मृति पुस्तक ‘यादों में दीवान नगरकोटी’ का अनावरण किया गया। पुस्तक में उनके साथियों के संस्मरणों के साथ उनके लेख और दुर्लभ छायाचित्र संकलित हैं। वक्ताओं ने दीवान नगरकोटी के शोध, पत्रकारिता और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को याद करते हुए उन्हें उत्तराखंड के सामाजिक सरोकारों से जुड़ी बौद्धिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
पुस्तक का सम्पादन अरुण कुकसाल, वरिष्ठ पत्रकार जगमोहन रौतेला और चन्द्रशेखर तिवारी ने किया है। इस अवसर पर गिरि विकास अध्ययन संस्थान, लखनऊ में निदेशक रहे और दून पुस्तकालय एवं शोध के वर्तमान अध्यक्ष प्रो. बी.के. जोशी ने दीवान नगरकोटी के साथ अपने लंबे जुड़ाव को याद किया। उन्होंने कहा, दीवान नगरकोटी हमेशा हमारे परिवार के सदस्य की तरह थे। गिरि संस्थान में उत्तराखंड के सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण में वे मेरे शोध सहयोगी रहे। पर्वतीय पृष्ठभूमि की गहरी समझ रखने वाले इस विनम्र व कर्मठ व्यक्ति असामयिक निधन हम सबके लिए बड़ा आघात रहा।
प्रो. जोशी ने बताया कि शोध परियोजना में उत्तराखण्ड के कई युवा उनकी शोध टीम में जुड़े थे। इनमें दीवान नगरकोटी के अलावा प्रदीप टम्टा, चन्द्रशेखर तिवारी, अरुण कुकसाल, मंगल सिंह आदि शामिल थे। उन्होंने कहा कि मित्रों द्वारा प्रकाशित यह स्मृति ग्रंथ दीवान की यादों को सहेजने का सार्थक प्रयास है। अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन में प्रशिक्षक के रूप में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उनका रुझान पत्रकारिता की ओर भी रहा उन्होंने अल्मोड़ा में पत्रकार के रूप में अपनी पहचान बनाई। उनके जीवन की यह यात्रा शोध से पत्रकारिता और फिर सामाजिक कार्य तक फैली रही, जिसमें पहाड़ के समाज और उसकी समस्याओं के प्रति प्रतिबद्धता बनी रही।
कार्यक्रम में प्रवीन भट्ट, रानू बिष्ट, डी.के. पाण्डे, ललता प्रसाद, राजेंद्र कुकसाल, सुंदर सिंह बिष्ट, प्रेम पंचोली, कल्याण सिंह रावत, बंसती बिष्ट, योगेश भट्ट, राहुल कोटियाल, हेम पंत और दयाल पाण्डे सहित बड़ी संख्या में दीवान नगरकोटी के मित्र, सहयोगी, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। ०००
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