​”150 बच्चों की ऐसी अनूठी कला, जिसने पूरे शहर को कर दिया मंत्रमुग्ध! जानिए भक्ति और रंगों का यह अनोखा रहस्य”

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रामनगर |
भगवान श्री जगन्नाथ जी की पावन रथयात्रा के उपलक्ष्य में पुष्कर सोसाइटी, रामनगर द्वारा आयोजित श्री जगन्नाथ चित्रकला प्रतियोगिता आस्था, संस्कृति और बाल प्रतिभाओं का अद्भुत संगम बन गई। नगर एवं आसपास के क्षेत्रों से आए लगभग 150 बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ प्रतियोगिता में भाग लेते हुए भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र, माता सुभद्रा तथा भारतीय संस्कृति एवं धार्मिक विषयों पर मनमोहक चित्र बनाकर सभी का मन मोह लिया।
कार्यक्रम में अतिथि के रूप में प्रसून श्रीवास्तव एवं प्रणय श्रीवास्तव उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि ब्लॉक प्रमुख मंजू नेगी, विशिष्ट अतिथि ज्येष्ठ प्रमुख संजय नेगी, “नेकी की दीवार” के संचालक तारा चन्द्र घिल्डियाल, भारत विकास परिषद के अध्यक्ष प्रवीण गुप्ता, सचिव अखिल मित्तल एवं परिषद की पूरी टीम ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया।
प्रतियोगिता का निष्पक्ष मूल्यांकन श्री सत्यप्रकाश मिश्रा एवं डॉ. रति चौधरी ने निर्णायक के रूप में किया। इस अवसर पर हेमा जोशी, बेबी, भावना जोशी, मधु ध्यानी, योगाचार्य अनुभा शर्मा, प्रीति गोला, खुशी शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक केंद्र भगवान श्री जगन्नाथ जी की मनमोहक रूप-सज्जा रही, जिसे मिनी अरोरा के विशेष सहयोग से साकार किया गया। आयोजन को सफल बनाने में ग्रेट मिशन पब्लिक स्कूल (हिम्मतपुर), ग्रेट मिशन स्कूल (दुर्गापुरी), सनराइज पब्लिक स्कूल, मेहरा पब्लिक स्कूल, मॉडर्न पब्लिक स्कूल, दयानंद पब्लिक स्कूल, यू.एस.आर. सहित अनेक विद्यालयों का सराहनीय सहयोग रहा।
पुष्कर सोसाइटी की सचिव नीतू चौहान, अध्यक्ष पूनम गुप्ता एवं उपाध्यक्ष भावना कांडपाल ने सभी अतिथियों, निर्णायकों, अभिभावकों, सहयोगी संस्थाओं एवं प्रतिभागी बच्चों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों की रचनात्मक क्षमता को नई दिशा देने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने भविष्य में भी समाजहित एवं बाल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने का संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागी बच्चों को शुभकामनाएं, स्मृति-चिन्ह एवं उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाओं के साथ हुआ। पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक चेतना और बच्चों की सृजनात्मक ऊर्जा का सुंदर संगम देखने को मिला।

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