किताबों के बस्ते के साथ घर लौटे बच्चे, पर हाथों में ऐसा क्या था जिसने बदल दी लालकुआं की सुबह?
( जुलाई से चल रही एक अनोखी मुहिम का अंतिम पड़ाव, जिसने नन्हें हाथों में थमा दिया भविष्य का बड़ा रहस्य)
लालकुआं। जुलाई के महीने से खामोशी से चल रही एक हरी-भरी मुहिम अब अपने सबसे रोमांचक मोड़ पर आ पहुंची है। सवाल यह नहीं था कि कितने पौधे जमीन में लगे, बल्कि सवाल यह था कि आने वाले कल को तबाही से कौन बचाएगा? इसका जवाब ढूंढने जब पर्यावरणविदों की टोली स्कूलों की चौखट पर पहुंची, तो एक नई इबारत लिखी गई।
इसी कड़ी में जनता इंटर कॉलेज, लालकुआं में उस वक्त माहौल बेहद खास हो गया जब बच्चों के बीच एक विशेष पर्यावरण संरक्षण संगोष्ठी का आयोजन हुआ। पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी एवं पर्यावरणविद डॉ. आशुतोष पन्त की अगुवाई में पहुंचे विशेषज्ञों ने बच्चों के सामने आने वाले खतरे—पॉलीथीन प्रदूषण, घटता भूजल और उजड़ते जंगलों की हकीकत रखी।
नन्हें कंधों पर भविष्य की ढाल डॉ. आशुतोष पन्त ने कहा कि विद्यार्थी सिर्फ आज के पाठक नहीं, बल्कि कल के नीति-निर्माता हैं। यदि यह पीढ़ी जल संरक्षण, पॉलीथीन के बहिष्कार और पौधरोपण का संकल्प ले ले, तो धरती का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित हो सकता है। जुलाई से जारी सघन वृक्षारोपण अभियान के समापन के साथ ही अब अधिक से अधिक स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता की अलख जगाने का नया संकल्प लिया गया है।
हाथों में था जिंदगी का तोहफा संगोष्ठी के अंत में बच्चों के चेहरों पर तब हैरानी और खुशी एक साथ दिखी, जब उनके हाथों में अमरूद और नींबू के फलदार पौधे थमाए गए। मकसद साफ था—हर बच्चा अपने घर के आंगन में एक नया जीवन रोपेगा और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी खुद उठाएगा।
इस संवाद में पूर्व अपर सचिव श्री जीवन चंद्र उप्रेती (जिन्होंने विशेष रूप से अपने यहां से पौधे उपलब्ध कराकर सहयोग दिया), पूर्व सैनिक कैप्टन सुंदर सिंह खनका, प्रधानाचार्य श्री हरीश दानू और दिव्यांग समिति के श्री संतोष कश्यप ने भी विद्यार्थियों को पर्यावरण का सिपाही बनने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. आशुतोष पन्त ने सभी अतिथियों, शिक्षकों और विद्यालय परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जब तक धरती हरी-भरी नहीं हो जाती, यह सफर रुकने वाला नहीं है।
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