कलश यात्रा का फल अश्वमेघ यज्ञ के समान : प० मनोज कृष्ण
कलश यात्रा के दर्शन से मिलता है महापुण्य: योगेश पन्त
माँ भद्रकाली दरबार कमस्यार घाटी बागेश्वर में संंगीतमय श्रीमद् देवी भागवत कथा का 30 मार्च को शुभारम्भ हो गया शुभारम्भ से पूर्व भव्य कलश यात्रा निकाली गई। सैकड़ों की संख्या में मातृशक्ति की अगुवाई में निकाली गई यह यात्रा आध्यात्म जगत की यादगार यात्रा रही।इस यात्रा में जहां सैकड़ों मातृशक्तियों के सिरों पर क्लश शुसोभित थे।वही सैकड़ों की संख्या में भक्तजन नाचकर देवी की कृपा का यशोगान कर रहे थे।
कथा वाचक ब्यास डा० मनोज कृष्ण पाण्डे ने बताया कि हिन्दू रीति के अनुसार जब भी कोई पूजा होती है, तब मंगल कलश की स्थापना अनिवार्य होती है। बड़े अनुष्ठान यज्ञ यागादि में पुत्रवती सधवा महिलाएँ बड़ी संख्या में मंगल कलश लेकर शोभायात्रा में निकलती हैं। उस समय सृजन और मातृत्व दोनों की पूजा एक साथ होती है।यह क्लश यात्रा की सबसे बड़ी बात है। समुद्र मंथन की कथा काफी प्रसिद्ध है। समुद्र जीवन और तमाम दिव्य रत्नों और उपलब्धियों का आपार केन्द्र है।इसी से क्लश की लम्बी कथा जुड़ी है।
उन्होनें कलश का पात्र जलभरा होता है। जीवन की उपलब्धियों का उद्भव आम्र पल्लव, नागवल्ली द्वारा दिखाई पड़ता है। जटाओं से युक्त ऊँचा नारियल ही मंदराचल है तथा यजमान द्वारा कलश की ग्रीवा (कंठ) में बाँधा कच्चा सूत्र ही वासुकी है। यजमान और ऋत्विज (पुरोहित) दोनों ही मंथनकर्ता हैं। पूजा के समय प्रायः उच्चारण किया जाने वाला मंत्र स्वयं स्पष्ट है कलशस्य मुखे विष्णु कंठे रुद्र समाश्रिताः मूलेतस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मात्र गणा स्मृताः। कुक्षौतु सागरा सर्वे सप्तद्विपा वसुंधरा, ऋग्वेदो यजुर्वेदो सामगानां अथर्वणाः अङेश्च सहितासर्वे कलशन्तु समाश्रिता
मंदिर के मुख्य संरक्षक योगेश पन्त ने कहा धर्मशास्त्रों के अनुसार कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। इस यात्रा के दर्शन का फल अतुलनीय है ।कथा से पूर्व निकाली गई कलश यात्रा के दर्शन से प्राणी के रोग,शोक,दुख,दरिद्रता एंव विपदाओं का हरण हो जाता है कलश पर लगाया जाने वाला स्वस्तिष्क का चिह्न चार युगों का प्रतीक है। यह हमारी चार अवस्थाओं, जैसे बाल्य, युवा, प्रौढ़ और वृद्धावस्था का प्रतीक है
माँ भद्रकाली दरबार में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत कथा वाचन से पूर्व धर्म,आध्यात्म,शांति का संदेश कलश यात्रा में दिया गया
यहाँ प्रथम दिवस की कथा का शुभारम्भ करते हुए व्यास मनोज कृष्ण पाण्डे ने देवी के पावन चरित्रों का सुन्दर शब्दों में वर्णन करते हुए श्रीमद् देवी भागवत की महिमां पर विस्तार से प्रकाश डाला यहाँ आयोजित कथा को लेकर समूचे क्षेत्र में जबरदस्त आध्यात्मिक उल्लास है
मंदिर कमेटी के सभी पदाधिकारियों सदस्यों व आस्थावान भक्तों ने इस भव्य आयोजन के लिए सभी का आभार जताया है



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