35 हजार पौधे रोपने का संकल्प; उत्तराखंड शासन के पूर्व अपर सचिव जे.सी. उप्रेती व संतोष कश्यप रहे मौजूद
लालकुआं (नैनीताल): पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने की दिशा में पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी एवं पर्यावरणविद डॉ. आशुतोष पन्त की मुहिम निरंतर जारी है। इसी क्रम में लालकुआं के कार रोड, संजयनगर और बिंदुखत्ता क्षेत्र के ग्रामीणों को फलदार पौधे भेंट किए गए। इस पुनीत कार्य में उत्तराखंड शासन के पूर्व अपर सचिव श्री जे.सी. उप्रेती तथा दिव्यांग समिति के अध्यक्ष श्री संतोष कश्यप का विशेष सहयोग रहा।
अक्टूबर में भी पौधरोपण: अनुकूल मौसम का उठाया जा रहा लाभ
अमूमन बड़े स्तर पर पौधरोपण के लिए जुलाई से सितंबर का समय सबसे बेहतर माना जाता है। हालांकि, डॉ. आशुतोष पन्त ने बताया कि इस वर्ष अक्टूबर माह में हुई अच्छी वर्षा के कारण मौसम पौधों के रोपण हेतु पूरी तरह अनुकूल बना हुआ है। इस वर्ष उन्होंने 35 हजार पौधे लगाने का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया था। नर्सरी में बचे हुए पौधों को ग्रामीणों के सहयोग से जल्दी से जल्दी रोपित करने का प्रयास किया जा रहा है।
कब और कैसे करें पौधरोपण: पर्यावरणविद के महत्वपूर्ण सुझाव
डॉ. पन्त ने अपने दीर्घ अनुभव के आधार पर पौधरोपण और पौधों की सुरक्षा से जुड़े उपयोगी सुझाव साझा किए:
- मैदानी क्षेत्रों में मौसम का ध्यान: मई-जून की भीषण गर्मी और 15 दिसंबर से 15 फरवरी के कड़ाके की ठंड (पाला) के दौरान बड़े पैमाने पर पौधे लगाने से बचना चाहिए। इस अवधि में नए पौधों का जीवित रहना कठिन होता है; इन्हें केवल विशेष देखभाल से ही बचाया जा सकता है।
- शीतकाल में सुषुप्तावस्था (Dormancy) वाले पौधे: सर्दियों में मैदानी क्षेत्रों में पॉपलर और पर्वतीय क्षेत्रों में अखरोट, सेब, नाशपाती व आड़ू के पौधे लगाए जाते हैं। शीतकाल में ये पौधे पत्तियां गिराकर सुषुप्तावस्था में चले जाते हैं और मार्च का महीना आते ही इनमें नई कोंपलें फूटने लगती हैं। डॉ. पन्त आगामी जनवरी-फरवरी में पर्वतीय अंचल में अखरोट के पौधे लगाने की तैयारी में हैं।
निराशा त्यागें, धरती को हरा-भरा बनाएं
विकास के नाम पर हो रहे पेड़ों के अंधाधुंध कटान और जंगलों के सिमटने पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. पन्त ने कहा कि स्थिति भले ही चिंताजनक हो, लेकिन हमें हिम्मत नहीं हारनी है। अधिक से अधिक पेड़ लगाना ही इसका सटीक समाधान है।
पौधरोपण के साथ-साथ डॉ. पन्त स्कूलों और कॉलेजों में छात्र-छात्राओं के बीच जल संरक्षण, पॉलीथीन के प्रयोग पर रोक और पर्यावरण रक्षा को लेकर जन-जागरूकता अभियान भी चला रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि पर्यावरण प्रेमियों और जागरूक नागरिकों के साझा प्रयास से परिस्थितियां जरूर बदलेंगी।
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