पहाड़ के बीहड़ों से सत्ता के शिखर तक: क्या था उस फौजी पिता का सपना, जिसने बदल दिया एक साधारण बालक का मुकद्दर?

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देहरादून/पिथौरागढ़। मानसखंड हिमालय की गोद में बसे सीमांत गांव का एक साधारण बालक, जिसके हिस्से बचपन में सिर्फ पहाड़ की दुर्गम चढ़ाइयां, कड़ाके की ठंड और बुनियादी सुविधाओं का अभाव था—वह आखिर कैसे देश के सबसे चर्चित युवा मुख्यमंत्रियों में शुमार हो गया? उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस हैरतअंगेज और संघर्षपूर्ण सफर के कई अनकहे पन्ने अब एक पुस्तक के रूप में सामने आए हैं।

लेखक एवं प्रकाशक तरुण पंत की यह नई कृति मुख्यमंत्री के स्वर्गीय पिता सूबेदार शेर सिंह धामी को समर्पित की गई है, जिन्होंने सरहद पर देश की रक्षा के साथ-साथ अपने बेटे के भीतर सेवा और अनुशासन के गहरे बीज बोए थे।

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जब 2016 में शुरू हुई अनसुने सफर की तलाश साल 2016 में मुख्यमंत्री की मौन स्वीकृति के बाद लेखक तरुण पंत ने पिथौरागढ़ के सुदूर सीमांत क्षेत्र टुण्डी और हड़खोला गांव का रुख किया था। वहां के बुजुर्गों और ग्रामीणों से बातचीत के दौरान एक ऐसे बच्चे की छवि उभरकर सामने आई, जिसने तंगहाली और अभावों को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। प्राथमिक शिक्षा से लेकर कॉलेज तक का सफर चुनौतियों से भरा रहा, लेकिन पिता के सैन्य पदकों और उनकी राष्ट्रभक्ति ने उस बालक के इरादों को फौलाद बना दिया था।

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छात्र राजनीति से सत्ता के शीर्ष तक की सीढ़ियां पुस्तक में सिलसिलेवार ढंग से दर्ज किया गया है कि कैसे एक युवा ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से अपने सार्वजनिक जीवन की नींव रखी। राजनीति को सत्ता नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम मानने की सोच के साथ वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े, पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के ओएसडी बने, भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली और आखिरकार उत्तराखंड की कमान अपने हाथों में ली।

पिता के संस्कार और पहाड़ की माटी का कर्ज सेना से सेवानिवृत्त सूबेदार और राज्य आंदोलनकारी रहे स्व. शेर सिंह धामी के दुर्लभ संस्मरण, तस्वीरें और सैन्य पदक इस किताब की आत्मा हैं। पुस्तक रेखांकित करती है कि आज उत्तराखंड के विकास, दुर्गम इलाकों तक सड़क-पानी-बिजली पहुंचाने और राज्य को नई पहचान दिलाने के पीछे वही मूल्य काम कर रहे हैं, जो धामी को अपने पिता से विरासत में मिले थे।

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पिता की छठी पुण्यतिथि और मुख्यमंत्री के रूप में उनके सफल व ऐतिहासिक कार्यकाल के अवसर पर समर्पित यह पुस्तक सिर्फ एक राजनेता की बायोग्राफी नहीं है, बल्कि यह हर उस युवा के लिए एक खुला सबक है जो अभावों के बीच बड़े सपने देखने की हिम्मत रखता है।

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