10 सितंबर को देवभूमि में मचेगी कैसी हलचल? शासन-प्रशासन से लेकर स्कूलों तक महामंथन, जानें क्या है पूरा प्लान

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उत्तराखंड में आगामी 10 सितंबर की तारीख को लेकर प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच सरगर्मियां अचानक तेज हो गई हैं। मौका है स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं देश के मूर्धन्य राजनेता ‘भारत रत्न’ पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती का। इस ऐतिहासिक अवसर को अविस्मरणीय और भव्य रूप देने के लिए ‘पंडित गोविंद बल्लभ पंत समारोह समिति’ पूरे राज्य में एक व्यापक महा-अभियान चला रही है।

सत्ता के शीर्ष से लेकर गणमान्य हस्तियों तक आमंत्रण

समारोह समिति के मुख्य संयोजक एवं पूर्व दर्जा राज्य मंत्री गोपाल सिंह रावत के अनुसार, कार्यक्रम को राज्यव्यापी स्वरूप प्रदान किया जा रहा है। इस गौरवमयी पर्व में सहभागिता के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित संपूर्ण मंत्रिमंडल, विधायकों और समाज के विशिष्ट व्यक्तित्वों को विशेष बुलावा भेजा गया है।

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व्यवस्थाओं को पुख्ता करने के लिए जिला प्रशासन और आयोजन समिति के पदाधिकारियों के बीच लगातार उच्चस्तरीय बैठकों का दौर जारी है, जिससे हर स्तर पर सामंजस्य सुनिश्चित किया जा सके।

हल्द्वानी का ‘तिकोनिया पंत पार्क’ बनेगा मुख्य केंद्र

राज्यस्तरीय आयोजनों के बीच कुमाऊं का प्रवेश द्वार हल्द्वानी इस बार मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगा:

  • रणनीतिक बैठक: गौरापड़ाव स्थित कैंप कार्यालय में प्रबंधों की समीक्षा कर कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया।
  • मुख्य मंच: शहर के ऐतिहासिक तिकोनिया स्थित पंत पार्क में केंद्रीय समारोह संपन्न होगा, जिसकी प्रत्यक्ष कमान हल्द्वानी नगर संयोजक को सौंपी गई है।
  • राज्यव्यापी समन्वय: समिति के संयोजक राजेश कुमार और सह-संयोजक ललित भट्ट सहित वरिष्ठ प्रतिनिधि पूरे प्रदेश का सघन दौरा कर व्यवस्थाओं को अंतिम स्पर्श दे रहे हैं।
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युवा पीढ़ी में जगेगी वैचारिक अलख: स्कूलों में होंगे विशेष आयोजन

यह महाआयोजन केवल सभाओं तक सीमित न रहकर राज्य की नई पीढ़ी को पंत जी के आदर्शों और राष्ट्र-निर्माण में उनके अमूल्य योगदान से रूबरू कराने का जरिया बनेगा। इसके तहत राज्यभर के सभी जिलों के शैक्षणिक संस्थानों में विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी:

  • रचनात्मक व बौद्धिक प्रतियोगिताएं: छात्र-छात्राओं के लिए निबंध लेखन, तात्कालिक भाषण, व्याख्यानमाला और चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा।
  • प्रेरणादायी सत्र: विद्यार्थियों को महान विभूति के जीवन संघर्ष, देश सेवा और ऐतिहासिक निर्णयों से परिचित कराया जाएगा ताकि वे उनके पदचिह्नों पर चलने की प्रेरणा ले सकें।
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