लालकुआँ की पावन धरती पर आज एक ऐसा दिव्य और अलौकिक प्रसंग सामने आया, जिसने हर किसी के हृदय को भक्ति और असीम आनंद से सराबोर कर दिया। नगर पंचायत कार्यालय में उस समय एक अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया, जब क्षेत्र के सम्मानित जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्ध जनों का आगमन हुआ। आज का यह दिन एक बेहद खास, पवित्र और कभी न भूलने वाली स्मृति में बदल गया
इस गरिमामयी और गौरवशाली अवसर पर नगर पंचायत लालकुआँ के यशस्वी अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह लोटनी को एक अत्यंत अनमोल और अलौकिक उपहार भेंट किया गया। यह अनुपम सौगात कोई और नहीं, बल्कि आदि शक्ति माँ अवंतिका के दिव्य स्वरूप, उनकी अलौकिक गाथाओं और चमत्कारों को अपने भीतर समेटे हुए पावन पुस्तक ‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ थी
जैसे ही यह पावन पुस्तक अध्यक्ष महोदय के कर-कमलों में सौंपा गया, पूरा वातावरण सात्विक खुशबू और सकारात्मक ऊर्जा से महक उठा। इस पावन और ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने वालों में क्षेत्र के लोकप्रिय सभासद भुवन पाण्डे, सजग सभासद धन सिंह बिष्ट और प्रबुद्ध व्यक्तित्व हेमन्त पाण्डे प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इन सभी गणमान्य जनों के चेहरों पर माँ की भक्ति का अनुपम तेज और प्रसन्नता साफ दिखाई दे रही थी।
इस पवित्र पुस्तक को श्रद्धापूर्वक ग्रहण करने के उपरांत नगर पंचायत अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह लोटनी अत्यंत भावुक और आल्हादित नजर आए। उन्होंने भक्ति रस में डूबकर बहुत ही मधुर और गंभीर वाणी में माँ अवंतिका की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि माँ अवंतिका आदि शक्ति का वह साक्षात और जागृत स्वरूप हैं, जिनकी असीम कृपा मात्र से मनुष्य के जीवन के बड़े से बड़े संकट भी तिनके की तरह उड़ जाते हैं। माँ अवंतिका संपूर्ण सृष्टि की पालनहार और आदिशक्ति हैं, जो अपने भक्तों के जीवन से अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान, शील और परम सुख का प्रकाश फैलाती हैं। उनकी महिमा अपरंपार है, उनके चरणों में शीश नवाने मात्र से ही व्याकुल अंतरात्मा को परम शांति और संबल की अनुभूति होती है।
अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह लोटनी ने भाव-विभोर होकर आगे कहा कि आज इस पवित्र पुस्तक के रूप में स्वयं माँ अवंतिका का साक्षात आशीर्वाद हमारे पूरे नगर को प्राप्त हुआ है। माँ अवंतिका के आशीष और उनकी दिव्य छत्रछाया से ही लालकुआँ क्षेत्र का निरंतर कल्याण हो रहा है और यहाँ की जनता के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास है। माँ की कृपा के बिना जीवन में किसी भी शुभ कार्य की कल्पना नहीं की जा सकती। अंत में उन्होंने पुस्तक भेंट करने आए सभी आदरणीय महानुभावों का हृदय की गहराइयों से आभार और धन्यवाद व्यक्त किया। इस अनूठी और पावन भेंट के बाद से ही पूरे क्षेत्र में इस दिव्य पुस्तक की सुंदरता और माँ अवंतिका की महिमा की चर्चाएं बड़े ही आदर, सत्कार और श्रद्धा के साथ की जा रही हैं।
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