संवाददाता, हल्दूचौड़ (रिम्पी बिष्ट)। हल्दूचौड़ की शिवपुरी कॉलोनी उस समय पूरी तरह से भक्ति के दिव्य रंग में सराबोर हो गई, जब वहां स्थित प्रसिद्ध नागेश्वर महादेव मंदिर में एक ऐसा अद्भुत और भव्य नजारा देखने को मिला, जिसकी चर्चा अब पूरे क्षेत्र में हर जुबान पर है। मंदिर परिसर में श्रद्धापूर्वक चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन कुछ ऐसा हुआ कि वहां मौजूद हर भक्त भाव-विभोर हो उठा और पूरा माहौल एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
कथा के चौथे दिन जैसे-जैसे समय आगे बढ़ा, पंडाल में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती चली गई और देखते ही देखते पूरा परिसर भक्तों से खचाखच भर गया। हर कोई उस खास पल का गवाह बनने के लिए उत्सुक था, जो इस पूरी कथा का सबसे मुख्य और आकर्षण का केंद्र माना जाता है। जैसे ही कथावाचक ने अपनी मधुर वाणी से भगवान श्रीकृष्ण के इस धरती पर अवतरण यानी उनके जन्मोत्सव का पावन प्रसंग सुनाना शुरू किया, वैसे ही पूरे पंडाल का वातावरण एकदम से बदल गया और चारों तरफ एक अनोखा उत्साह फैल गया।
जैसे ही वासुदेव जी के घर कन्हैया के जन्म की कथा पूरी हुई, वैसे ही पूरा इलाका “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के गगनभेदी जयघोष से गूंज उठा। उस समय पंडाल का दृश्य अत्यंत मनमोहक था। वहां मौजूद हजारों श्रद्धालु अपनी सुध-बुध खोकर भक्ति के अटूट सागर में गोते लगाने लगे और ढोल-नगाड़ों की थाप पर आनंद से झूम उठे। चारों तरफ बिखरे गुलाल और फूलों की वर्षा के बीच हर कोई भगवान के बाल रूप के स्वागत में मगन हो गया, जिसने हर देखने वाले को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस पावन और ऐतिहासिक अवसर पर पवित्र नैमिषारण्य तीर्थ से पधारे परम पूज्य कथावाचक पंडित प्रभात कुमार त्रिपाठी महाराज ने व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को एक बेहद गहरा और कल्याणकारी संदेश दिया। उन्होंने बड़े ही सरल शब्दों में समझाया कि आखिर भगवान को इस संसार में मनुष्य रूप में क्यों आना पड़ता है। महाराज जी ने कहा कि जब-जब धरती पर अन्याय और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान श्रीकृष्ण का अवतार धर्म की स्थापना, मानवता की रक्षा और जन-कल्याण के लिए होता है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह हर मनुष्य को सत्य, निस्वार्थ प्रेम, सेवा और सच्ची भक्ति के मार्ग पर चलने की सबसे बड़ी प्रेरणा देती है।
इस धार्मिक उत्सव की भव्यता को चार चांद लगाने के लिए कार्यक्रम में राधा-कृष्ण की बेहद आकर्षक और सजीव झांकियां भी प्रस्तुत की गईं। इन मनमोहक झांकियों ने वहां मौजूद हर एक श्रद्धालु का दिल जीत लिया और लोग एकटक होकर प्रभु के इस सुंदर रूप को निहारते रहे।
कथा के भव्य समापन पर सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की महाआरती उतारी और देर तक चले भजन-कीर्तन में भाग लेकर आत्मिक शांति का अनुभव किया। इस विशाल धार्मिक आयोजन के मुख्य सूत्रधार और आयोजक सुमनलता दीक्षित एवं सुबोध दीक्षित ने इस सफल और भक्तिमय आयोजन पर क्षेत्रवासियों का आभार जताया। इसके साथ ही उन्होंने सभी धर्मप्रेमियों से एक विशेष अपील करते हुए कहा कि वे अपने दैनिक जीवन से थोड़ा समय निकालकर इस ज्ञान यज्ञ में जरूर शामिल हों। उन्होंने सभी से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा का श्रवण करने और अपने जीवन को सफल बनाकर पुण्य लाभ अर्जित करने का विनम्र आग्रह किया।
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