अगाध श्रद्धा की अनूठी मिसाल: माँ अवंतिका के भक्त गोपाल दत्त जोशी ने अथक परिश्रम से संवारा मंदिर परिसर

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अगाध श्रद्धा की अनूठी मिसाल: माँ अवंतिका के भक्त गोपाल दत्त जोशी ने अथक परिश्रम से संवारा मंदिर परिसर
लालकुआँ। आस्था और निस्वार्थ सेवा जब एक साथ मिलते हैं, तो प्रकृति भी मुस्कुरा उठती है। कुछ ऐसा ही नजारा इन दिनों लालकुआँ क्षेत्र में देखने को मिल रहा है, जहाँ माँ अवंतिका देवी के प्रति गहरी आस्था रखने वाले स्थानीय निवासी श्री गोपाल दत्त जोशी क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं। उन्होंने अपनी अटूट भक्ति और दिन-रात के अथक परिश्रम से माँ अवंतिका मंदिर परिसर का कायाकल्प कर उसे एक अलौकिक और प्राकृतिक रूप से सुसज्जित स्थल में बदल दिया है।
माँ अवंतिका के चरणों में अपनी सेवा अर्पित करने वाले श्री गोपाल दत्त जोशी का अटूट विश्वास है कि माँ के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं जाता। मंदिर परिसर को संवारने के अपने इस सफर के बारे में बात करते हुए उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि माँ अवंतिका की महिमा अपरम्पार और अनंत है। उनके आशीर्वाद के बिना पत्ता भी नहीं हिलता। उन्हें माँ की सेवा करने का जो यह अवसर मिला है, इसे वह अपना परम सौभाग्य मानते हैं और यह सारा कार्य माँ की कृपा और प्रेरणा से ही संभव हो पाया है।
श्री जोशी ने केवल शब्दों से ही नहीं, बल्कि अपने कर्मों से माँ के प्रति अपनी भक्ति को सिद्ध किया है। उन्होंने अपने कठिन परिश्रम के बल पर पूरे मंदिर परिसर को प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत और सुसज्जित बना दिया है। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए परिसर में विभिन्न प्रकार के औषधीय, छायादार और फलदार पौधे लगाए गए हैं। इसके साथ ही रंग-बिरंगे फूलों की क्यारियों और प्राकृतिक व्यवस्था के जरिये पूरे माहौल को जीवंत और शांतिपूर्ण बनाया गया है। मंदिर परिसर में आने वाले लोगों को एक शांत और स्वच्छ वातावरण मिले, इसके लिए उन्होंने खुद आगे बढ़कर जिम्मेदारी उठाई है।
माँ अवंतिका के दर्शन के लिए दूर-दराज से आने वाले भक्तजन जब मंदिर परिसर में कदम रखते हैं, तो यहाँ का बदला हुआ स्वरूप देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। दर्शनार्थियों का कहना है कि मंदिर में प्रवेश करते ही जो दिव्य शांति और सकारात्मक ऊर्जा महसूस होती है, वह अद्भुत है। आने वाले भक्तों ने श्री गोपाल दत्त जोशी के इस निस्वार्थ कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। श्रद्धालुओं का मानना है कि आज के समय में जहाँ लोग अपने निजी स्वार्थों में व्यस्त हैं, वहीं जोशी जी जैसे व्यक्तित्व समाज को धार्मिक और सामाजिक सेवा की एक नई राह दिखा रहे हैं। उनके इस योगदान ने माँ अवंतिका धाम की भव्यता में चार चांद लगा दिए हैं।