सेंचुरी पल्प एंड पेपर वर्कर्स यूनियन के संस्थापक व संरक्षक की तृतीय पुण्यतिथि पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब; वक्ताओं ने कहा—”श्रमिकों के हक और स्वाभिमान की अमर आवाज़ थे सुयाल जी”
लालकुआँ की औद्योगिक धरा पर जब भी श्रमिकों के हक, स्वाभिमान और न्यायपूर्ण संघर्ष का इतिहास लिखा जाएगा, उसमें स्वर्गीय देवकी नंदन सुयाल जी का नाम स्वर्णाक्षरों में सबसे अग्रणी पंक्ति में दर्ज रहेगा। ‘सेंचुरी पल्प एंड पेपर वर्कर्स यूनियन’ के संस्थापक, संरक्षक और श्रमिकों के संघर्षशील नेता स्वर्गीय सुयाल जी की तृतीय पुण्यतिथि पर लालकुआँ में उन्हें अत्यंत भावभीने और श्रद्धापूर्ण माहौल में याद किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित हर आंख नम थी और हर दिल में अपने उस प्रिय नेता के प्रति अगाध आदर था, जिसने अपना समूचा जीवन कामगारों की सेवा में समर्पित कर दिया।
संघर्ष और समर्पण का पर्याय: एक युगपुरुष का जीवन
देवकी नंदन सुयाल जी केवल एक यूनियन नेता नहीं थे, बल्कि वे हजारों श्रमिक परिवारों के सच्चे संरक्षक और अभिभावक थे। जिस दौर में औद्योगिक गलियारों में मजदूरों की आवाज़ को दबा दिया जाता था, उस दौर में सुयाल जी ने श्रमिकों को संगठित कर उनके भीतर आत्मसम्मान और अधिकारों के प्रति चेतना जगाई। ‘सेंचुरी पल्प एंड पेपर वर्कर्स यूनियन’ की नींव रखकर उन्होंने यह साबित किया कि संगठित शक्ति और सत्य के मार्ग पर चलकर किसी भी बड़ी से बड़ी ताकत से अपने जायज हक हासिल किए जा सकते हैं।
उनका संघर्ष कभी व्यक्तिगत स्वार्थ या राजनीति से प्रेरित नहीं रहा। उनकी राजनीति का केंद्र केवल एक था—कारखाने की भट्ठी में पसीना बहाने वाले अंतिम मजदूर का कल्याण। मिल प्रबंधन के साथ वार्ताओं की मेज पर जब भी सुयाल जी बैठते थे, तो उनका तार्किक दृष्टिकोण, कानूनी समझ और श्रमिकों के प्रति अटूट निष्ठा बड़े से बड़े नीति-निर्धारकों को झुकने पर मजबूर कर देती थी।
सादगी और सिद्धांतों के धनी
सुयाल जी के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खूबी उनकी सादगी, निर्भीकता और निष्कलंक छवि थी। वे जितने दृढ़ अपने सिद्धांतों में थे, उतने ही कोमल और सुलभ आम श्रमिकों के लिए थे। किसी भी मजदूर के घर का सुख-दुख हो या फिर कार्यस्थल पर उपजी कोई जटिल समस्या, वे बिना किसी भेद-भाव के आधी रात को भी मदद के लिए तत्पर खड़े रहते थे।
लालकुआँ के सामाजिक और औद्योगिक विकास में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि उद्योग और श्रमिक एक-दूसरे के पूरक हैं; उद्योग की प्रगति तभी संभव है जब कामगार का भविष्य सुरक्षित और सम्मानित हो। यही संतुलन उनकी दूरदर्शी सोच का प्रमाण था।
श्रद्धांजलि सभा में गूंजी स्मृतियां
उनकी तृतीय पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में यूनियन पदाधिकारियों, मिल के वर्तमान व सेवानिवृत्त कर्मचारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय गणमान्य नागरिकों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने भावुक कंठ से कहा कि सुयाल जी का भौतिक रूप से हमारे बीच न होना एक ऐसा खालीपन है जिसे कभी भरा नहीं जा सकता। वक्ताओं ने स्मरण किया कि किस प्रकार विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी और हमेशा आगे बढ़कर संकटों का सामना किया। उनके दिखाए रास्ते, उनकी कार्यशैली और उनकी सीख आज भी यूनियन के हर सदस्य के लिए मार्गदर्शक प्रकाश स्तंभ की तरह हैं।
उपस्थित जनसमूह ने दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और सर्वसम्मति से यह संकल्प लिया कि सुयाल जी के बताए सत्य, निष्ठा और श्रमिक एकता के रास्ते पर अडिग रहकर ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है।
देवकी नंदन सुयाल जी आज भले ही हमारे बीच सशरीर उपस्थित न हों, लेकिन लालकुआँ की हर धड़कन, मिल के हर सायरन और श्रमिकों के हर साझा संघर्ष में उनका विचार और उनका नाम सदैव अमर रहेगा।
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