प्रकृति के संरक्षण का एक ऐसा चौंकाने वाला महा-अभियान… क्या सेंचुरी मिल रचने जा रही है वृक्षारोपण का एक नया इतिहास?
लालकुआँ/ उत्तराखंड के पावन लोक-पर्व ‘हरेला’ के शुभ अवसर पर जहां चारों ओर हरियाली का उत्सव मनाया जा रहा है, वहीं इस बार एक ऐसी विस्मयकारी घोषणा सामने आई है जिसने सबको हैरत में डाल दिया है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए सेंचुरी मिल ने एक ऐसा संकल्प लिया है, जो आने वाले समय में समूचे क्षेत्र की आबोहवा और भूगोल को पूरी तरह से बदलने का माद्दा रखता है।
इस ऐतिहासिक त्योहार के मौके पर सेंचुरी मिल के उपाध्यक्ष (वाइस प्रेसिडेंट) नरेश चन्द्रा ने कंपनी के एक बेहद बड़े और दूरगामी मंसूबे का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि सेंचुरी के सामाजिक वानिकी एवं पर्यावरण विभाग ने इस बार प्रकृति को एक अनूठा उपहार देने की तैयारी की है। यह योजना इतनी विशाल है कि सुनकर कोई भी दंग रह जाए— इस बार समूचे क्षेत्र में रिकॉर्ड ढ़ाई करोड़ (2.5 करोड़) पौधों को रोपित करने का एक अविश्वसनीय महा-लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इतनी बड़ी संख्या में वृक्षारोपण का यह दावा पर्यावरण के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करने की ओर इशारा कर रहा है।
नरेश चन्द्रा ने इस महा-अभियान की गहराई को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह केवल संख्या का आंकड़ा नहीं है, बल्कि धरती को दीर्घकालिक जीवन देने का एक ठोस प्रयास है। इस ढ़ाई करोड़ के महा-लक्ष्य के तहत पर्यावरण और सेहत की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण पौधों को चुना गया है। अभियान के अंतर्गत औषधीय गुणों से भरपूर और फलदार पौधों का बड़े पैमाने पर रोपण किया जाएगा, जिसमें नीम, आंवला, अर्जुन, अशोक, जामुन, बोतल सावनी, पीपल, बरगद, कचनार, चाँदनी और कनेर जैसी विविध और बहुमूल्य प्रजातियां शामिल हैं।
हरेला के इस पावन पर्व पर सेंचुरी मिल द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल धरती को हरी चुनर ओढ़ाने का काम करेगा, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित आवरण भी तैयार करेगा। अब देखना यह होगा कि ढ़ाई करोड़ वृक्षों के रोपण का यह विशाल और महत्वाकांक्षी सपना कितनी जल्दी धरातल पर उतरकर एक नया इतिहास रचता है।
लेटैस्ट न्यूज़ अपडेट पाने हेतु -
👉 वॉट्स्ऐप पर हमारे समाचार ग्रुप से जुड़ें
