हल्दूचौड़ के प्रसिद्ध शिवपुरी नागेश्वर महादेव मंदिर में इन दिनों भक्ति की एक ऐसी अविरल धारा बह रही है, जिसमें हर कोई सराबोर नजर आ रहा है। मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान हर दिन नए-नए रंग देखने को मिल रहे हैं, लेकिन बीते दिन कथा में एक ऐसा मोड़ आया जिसने वहां मौजूद हर श्रद्धालु की धड़कन को एक पल के लिए रोक दिया और फिर पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा।
कथा के विशेष प्रसंग के दौरान जैसे ही पूज्य शुकदेव महाराज के प्रसंगों को आगे बढ़ाते हुए कथावाचक ने भगवान विष्णु के पांचवें अवतार का वर्णन शुरू किया, पूरा वातावरण एक अलौकिक ऊर्जा से भर गया। राजा बलि के अहंकार को तोड़ने और देवताओं के कल्याण के लिए जब भगवान ने वामन रूप धारण किया, तो पंडाल में बैठे श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर इस कथा का रसपान कर रहे थे। लेकिन असली सस्पेंस और आकर्षण तब पैदा हुआ, जब कथा के बीच में ही अचानक साक्षात वामन भगवान के रूप में एक नन्हा बालक मंच के सामने प्रकट हो गया।
हाथ में छोटा सा छाता, माथे पर तिलक, पैरों में छोटी सी खड़ाऊं और पीले वस्त्रों में सजे उस नन्हें बालक को देखते ही ऐसा लगा मानो द्वापर युग का वह दृश्य साक्षात कलयुग के इस पावन धाम में उतर आया हो। बालक की मासूमियत और उसके चेहरे के तेज ने वहां उपस्थित हर एक भक्त का मन पूरी तरह से मोह लिया। जैसे ही उस नन्हें वामन भगवान ने अपने छोटे-छोटे कदमों से पंडाल में प्रवेश किया, भक्तों की आंखों से श्रद्धा के आंसू छलक पड़े।
कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालु अपनी सुध-बुध भूलकर उस बाल रूप की आरती उतारने लगे। हर कोई उस दिव्य रूप के दर्शन करने और उनके चरणों में शीश नवाने के लिए आतुर दिखाई दिया। महिलाओं और बुजुर्गों ने भावविह्वल होकर भजनों पर नृत्य करना शुरू कर दिया। पूरा मंदिर परिसर ‘हरे रामा, हरे कृष्णा’ और ‘जय वामन देव’ के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
कथा व्यास ने इस प्रसंग की महत्ता को समझाते हुए कहा कि भगवान कभी धन-दौलत या बड़े स्वरूप के भूखे नहीं होते, वे तो केवल सच्चे और निष्कपट प्रेम के भूखे हैं। जैसे ही मनुष्य के भीतर से ‘मैं’ और अहंकार की भावना समाप्त होती है, भगवान उसके जीवन में प्रवेश कर जाते हैं।
इस दिव्य प्रसंग के समापन पर भव्य आरती का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने भाग लिया और वामन भगवान बने नन्हें बालक को फल, मिठाई और उपहार भेंट कर आशीर्वाद लिया। हल्दूचौड़ के शिवपुरी नागेश्वर महादेव मंदिर में घटी यह सुंदर घटना अब क्षेत्र के लोगों के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ चुकी है, जिसकी चर्चा हर जुबान पर है।
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