एक पावन पुस्तक की भेंट और उस अनोखे फल के भीतर छिपे अमृत का रहस्य, हल्दूचौड़ की भूमि पर जब खुला अलौकिक ज्ञान का संसार

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हल्दूचौड़ (उत्तराखंड)। अध्यात्म और भक्ति के रंग में सराबोर हल्दूचौड़ का शिवपुरी क्षेत्र इन दिनों एक अलौकिक अनुभूति का केंद्र बना हुआ है। नैमिषारण्य तीर्थ की पावन धरा से पधारे प्रसिद्ध कथा वाचक प्रभात कुमार त्रिपाठी के आगमन से पूरे क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय हो गया है। इसी पावन श्रृंखला में हाल ही में एक ऐसा अनूठा क्षण आया, जिसने इस आध्यात्मिक समागम को और भी गौरवमयी और स्मरणीय बना दिया।
क्षेत्र के प्रतिष्ठित पत्रकार भोला दत्त कफल्टिया और पंकज दीक्षित ने कथा व्यास प्रभात कुमार त्रिपाठी से विशेष शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उन्होंने श्री त्रिपाठी को ‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ नामक एक अत्यंत पावन पुस्तक भेंट स्वरूप प्रदान की। यह भेंट केवल एक पुस्तक का आदान-प्रदान नहीं था, बल्कि यह पत्रकारिता और अध्यात्म के सुंदर समन्वय का प्रतीक बन गया।
पुस्तक ग्रहण करने के उपरांत कथा वाचक श्री त्रिपाठी ने प्रसन्नता व्यक्त की और इसके बाद श्रीमद् भागवत महापुराण की महिमा पर एक अत्यंत विस्तृत, गूढ़ और रसपूर्ण चर्चा की। उन्होंने भागवत के वास्तविक स्वरूप को समझाते हुए एक ऐसी सुंदर बात कही जिसने श्रोताओं के हृदय को छू लिया। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कोई सामान्य ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा विलक्षण और अलौकिक फल है जिसके भीतर सिर्फ और सिर्फ रस ही रस समाया हुआ है
श्रीमद् भागवत के अनुसार इस दिव्य फल की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि संसार के अन्य फलों में छिलके और गुठली जैसी चीजें होती हैं जिन्हें अलग करना पड़ता है, लेकिन भागवत रूपी यह फल पूरी तरह से अमृत रस से भरा है। यह वेदरूपी कल्पवृक्ष का वह पका हुआ फल है, जो शुकदेव जी के मुखरूपी अमृत के स्पर्श से और भी मधुर हो गया है। संसार का कोई भी प्राणी यदि इस रस का एक बार भी सच्चे मन से पान कर ले, तो उसे सांसारिक दुखों से मुक्ति मिल जाती है और उसका जीवन सदा के लिए धन्य हो जाता है।
इसके साथ ही, भेंट की गई पुस्तक के संदर्भ में उन्होंने आदि शक्ति के विभिन्न स्वरूपों का अत्यंत सुंदर, सजीव और भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि माँ भगवती किस प्रकार सृष्टि के कण-कण में ऊर्जा बनकर व्याप्त हैं। देवी के नौ रूपों की महिमा गाते हुए उन्होंने कहा कि वह जब ममतामयी होती हैं तो शैलपुत्री और ब्रह्मचारिणी बनकर संसार को शांति का संदेश देती हैं, और जब अधर्म का नाश करना होता है तो वही आदि शक्ति दुर्गा और महाकाली का रौद्र रूप धारण कर लेती हैं। माँ अवंतिका और जगत जननी के विभिन्न रूपों की यह व्याख्या सुनकर वहाँ उपस्थित सभी लोग भाव-विभोर हो उठे
इस आध्यात्मिक संवाद और दिव्य चर्चा ने शिवपुरी के पूरे वातावरण को एक नई सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। उपस्थित श्रद्धालुओं और प्रबुद्ध जनों ने इस ज्ञान चर्चा का भरपूर आनंद लिया और कथा व्यास के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।