हल्द्वानी/कंक्रीट के बढ़ते जंगलों और आसमान छूते तापमान के बीच जब धरती की सांसें फूलने लगी हैं, तब देवभूमि के आंचल में खामोशी से एक ऐसा महाभियान आकार ले रहा है जो भविष्य की पीढ़ियों का जीवन संवारने में जुटा है। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से 14 जुलाई 2026 को 500 पौधों के रोपण से शुरू हुआ ‘हरियाली बढ़ाओ अभियान’ आज एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। इस अभियान के तहत प्रतिदिन दो से तीन स्थानों पर ग्रामीणों को फलदार पौधे निशुल्क भेंट किए जा रहे हैं। महज 15 दिनों के भीतर कालाढूंगी, हल्दूचौड़, गौलापार, रामनगर, रानीखेत, द्वाराहाट, नैनीताल, किच्छा, हल्द्वानी, रुद्रपुर, भीमताल, कोटाबाग और ओखलकांडा जैसे कई क्षेत्रों में 38 से अधिक कार्यक्रम आयोजित कर हरी-भरी क्रांति की नींव रख दी गई है।
इस वर्ष 35 हजार पौधे लगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है, लेकिन यह सफर केवल आज का नहीं है। वर्ष 1988 से व्यक्तिगत संसाधनों के बल पर शुरू हुआ यह संकल्प आज 38 वर्षों की निरंतर साधना बन चुका है। हर साल 20 हजार से अधिक पौधे लगाने की इस अनवरत यात्रा में अब तक 4 लाख 80 हजार से अधिक पौधे रोपित कर धरती का शृंगार किया जा चुका है। इतना ही नहीं, पर्यावरण को संजीवनी देने के लिए 15 छोटे सघन वन भी तैयार किए गए हैं। अब विभिन्न शिक्षण संस्थानों से संपर्क कर उनके परिसरों में सघन वन विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ी को शुद्ध प्राणवायु मिल सके।
पूरे सौरमंडल में पृथ्वी ही एकमात्र ऐसा ग्रह है जहां जीवन का स्पंदन है। यदि हरियाली नहीं होगी तो ऑक्सीजन नहीं मिलेगी और बिना प्राणवायु के जीवन की कल्पना भी असंभव है। आज विकास की अंधी दौड़ में जिस बेरहमी से पेड़ काटे जा रहे हैं, वह बेहद चिंताजनक है। कागजों पर तो बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर केवल खानापूर्ति दिखाई देती है। यदि समय रहते हम सतर्क न हुए तो बढ़ता तापमान और असंतुलित मौसम मानव सभ्यता के अस्तित्व के लिए ही खतरा बन जाएगा।
इस निस्वार्थ सेवा यात्रा में समाज के हर वर्ग का सहयोग मिल रहा है। मीडिया जगत के पत्रकार बंधु इस खबर को जन-जन तक पहुंचाकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इस पूरे अभियान को धरातल पर उतारने में डॉ. विनोद बिरखानी, डॉ. हरीश जोशी, श्री मुकेश जोशी, श्री कपिल राणा, श्री असित मंडल, श्री मदन आर्य, वन निगम से सेवानिवृत श्री महेश तिवारी, समाजसेवी श्री गोपाल जोशी, श्री आशुतोष साही, श्री मनोज पाठक, श्री कमल जोशी, श्री गोविंद बल्लभ भट्ट, श्री योगेश जोशी, श्रीमती शोभा जोशी, श्री संजय त्यागी, श्री एच एस धामी, श्री हरीश कांडपाल, श्री दिलीप मेहरा, श्री लक्ष्मण सिंह गौनिया, श्री नित्यानंद पांडे, श्री चंदन सिंह बोरा, श्री दीप तिवारी, श्री आर पी सिंह, श्री रजत गंगवार, श्री गिरीश जोशी, प्रो. मृगेश पांडे, डॉ. प्राची जोशी, डॉ. निवेदिता जोशी और श्री कैलाश पांडे जैसे निष्ठावान सहयोगियों का अमूल्य योगदान रहा है।
आइए, कागजी वादों से परे हटकर धरातल पर एक-एक पौधा रोपें और अपनी धरती को फिर से हरा-भरा और जीवनदायी बनाएं।
डॉ. आशुतोष पन्त
पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी एवं पर्यावरणविद
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