महिला संगठन ऐपवा ने उठायी संसद के आगामी मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण बिल बिना शर्त लागू करने की मांग

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महिला आरक्षण बिल को परिसीमन से जोड़ने की राजनीति बंद करो : श्वेता राज
• उत्तराखण्ड में परिसीमन जनसंख्या के आधार पर नहीं, क्षेत्रफल की आधार पर हो: डॉ शिवानी पाण्डेय

हल्द्वानी/संसद के मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण बिल को बिना शर्त लागू करने की मांग के साथ आज बागजाला में अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन “ऐपवा” द्वारा एक बैठक का आयोजन किया गया।

मुख्य वक्ता ऐपवा राष्ट्रीय सचिव कॉमरेड श्वेता राज ने प्रमुखता से बात उठाई कि, एक तरफ तो एसआईआर में बड़ी संख्या में महिलाओं ने नाम कटे हैं और दूसरी तरफ भाजपा सरकार महिलाओं को 33% महिला आरक्षण देने में टाल मटोल कर रही है। भाजपा सरकार महिला आरक्षण बिल को परिसीमन से जोड़कर पूरे देश में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करना चाहती है। असम और जम्मू कश्मीर के चुनाव इसके हालिया उदाहरण है। पिछले संसद सत्र में संसद में विपक्ष तथा सड़क पर महिला संगठनों ने इसका पुरजोर विरोध किया और भाजपा सरकार के साम्प्रदायिक एजेंडे को पीछे धकेला। वर्तमान समय में जरूरत है कि पूरे देश में एकजुट होकर महिला आरक्षण बिल को बेशर्त लागू करने की मांग उठाई जाए तथा इसी मानसून सत्र में इसे लागू किया जाए।

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ऐपवा की उत्तराखण्ड संयोजक डॉ शिवानी पाण्डेय ने कहा कि वर्तमान सरकार चाह ही नहीं रही है कि महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिले। महिला संगठनों की मांग है कि महिलाओं को आरक्षण के सवाल पर बिना किसी किंतु परन्तु के साथ 2029 के लोकसभा चुनाव और उस से पहले राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में इसे लागू किया जाय। उत्तराखण्ड में परिसीमन को जनसंख्या के आधार पर नहीं बल्कि क्षेत्रफल की आधार पर किया जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो पहाड़ी राज्य में न तो पहाड़ के मुद्दों को महत्वपूर्ण जगह मिल पाएगी और न ही मजबूरी में शहरों की तरफ आए लोगों की समस्याओं को सुलझा पाएंगे। महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ते जा रहे है, लेकिन सरकार इन सवालों को अपराध और न्याय का मामला न बनाकर सांप्रदायिक मामला बन रही है। जिसके खिलाफ एकजुट हो कर लड़ने की बहुत जरूरत है।

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भाकपा माले जिला सचिव डॉ कैलाश पांडेय ने कहा कि, राज्य में अंकिता भंडारी को न्याय के सवाल पर राज्य सरकार और भाजपा -संघ पूरी तरह से आरोपियों के पक्ष में नज़र आते हैं। आम लोगों के जबरदस्त दबाव के बावजूद आज तक आरोपी वीआईपी अपने पदों पर है और उन्हें अपने अपने संगठनों में बड़े पदभार भी दिए जा रहे है। हिमालयी राज्यों में उत्तराखण्ड महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा असुरक्षित राज्यों में शामिल है।

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किसान महासभा बागजाला की अध्यक्ष डॉ उर्मिला रैस्वाल ने कहा कि, उत्तराखंड में महिलाओं और दलितों के खिलाफ हिंसा लगातार बढ़ रही है। जिसके खिलाफ एकजुट होने की जरूरत है।

ऐपवा की पहलकदमी पर आगामी 20-21 जुलाई को महिला आरक्षण बिल को बिना शर्त लागू करने की मांग के साथ देश भर में प्रदर्शन किया जायेगा।

इस बैठक में श्वेता राज, डॉ शिवानी पाण्डेय, डॉ उर्मिला रैस्वाल, विमला देवी, मीना भट्ट, हेमा आर्य, रेशमा, विमला पांडे, देवकी, शोभा, तुलसी, चंपा देवी, सुनीता, हीरा देवी, हेमा देवी, पार्वती देवी, डॉ कैलाश पाण्डेय, प्रेम सिंह नयाल, दौलत सिंह आदि मौजूद रहे।

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