लालकुआं की सियासी बिसात पर सबसे बड़ा सवाल, क्या तीन दशकों के अनवरत संघर्ष और जनसेवा की तपस्या को इस बार मिलेगा शीर्ष नेतृत्व का आशीर्वाद
लालकुआँ/आगामी चुनावों को लेकर लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मियां पूरी तरह तेज हो चुकी हैं। इस बार भारतीय जनता पार्टी से उम्मीदवारी की दौड़ में एक ऐसा नाम बेहद प्रमुखता से उभर कर सामने आ रहा है, जिसने अपने जीवन का एक लंबा कालखंड क्षेत्र के विकास, संगठन की मजबूती और जनसेवा में समर्पित कर दिया है। यह नाम है 54 वर्षीय वरिष्ठ भाजपा नेता उमेश शर्मा का, जो वर्ष 2007 से लगातार पार्टी से दावेदारी कर रहे हैं। इस बार उन्हें पूर्ण विश्वास है कि शीर्ष नेतृत्व उनके दशकों के त्याग, अद्वितीय समर्पण और क्षेत्र में उनकी अपार लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें अपना प्रत्याशी अवश्य बनाएगा।
हल्दूचौड़ के जग्गी बंगर निवासी उमेश शर्मा के लिए लालकुआं विधानसभा क्षेत्र सिर्फ एक चुनावी क्षेत्र नहीं, बल्कि उनकी असली कर्मभूमि है। उनकी जड़ें इस माटी से गहराई से जुड़ी हैं। बेरीपड़ाव की प्राइमरी पाठशाला से प्रारंभिक शिक्षा शुरू कर राजकीय इंटर कॉलेज हल्दूचौड़ से इंटरमीडिएट और एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी से बीएससी तक की उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले उमेश शर्मा क्षेत्र के हर गांव, हर गली और यहां की भौगोलिक व सामाजिक परिस्थितियों से भली-भांति वाकिफ हैं। यही कारण है कि स्थानीय जनता के सुख-दुख में वे हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े नजर आते हैं।
उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू होकर राज्य निर्माण आंदोलन तक के बेहद शानदार और प्रेरणादायक पड़ावों से गुजरा है। उमेश शर्मा के राजनीतिक जीवन का शंखनाद भले ही वर्ष 1992 में छात्र संघ चुनावों से हुआ हो, लेकिन वे वर्ष 1989 से ही एक निष्ठावान सिपाही के रूप में भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा से जुड़ चुके थे। उन्होंने केवल राजनीतिक पदों की लालसा नहीं रखी, बल्कि जब भी समाज और देश को जरूरत पड़ी, वे हमेशा आगे रहे। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण आंदोलन हो या फिर पृथक उत्तराखंड राज्य निर्माण का ऐतिहासिक संघर्ष, दोनों में ही उनकी भूमिका बेहद सक्रिय और ऊर्जावान रही है।
क्षेत्र के युवाओं के भविष्य को संवारने और स्थानीय औद्योगिक इकाइयों में उन्हें रोजगार दिलाने के लिए उमेश शर्मा का योगदान अतुलनीय माना जाता है। उन्होंने स्थानीय युवाओं के हक के लिए समय-समय पर जबरदस्त आंदोलन किए, जिसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि क्षेत्र के अनेक बेरोजगार युवाओं को स्थानीय उद्योगों में रोजगार प्राप्त हुआ। इसके अलावा, चाहे सड़कों का निर्माण हो, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हो या फिर गरीबों के हक की लड़ाई, उमेश शर्मा ने हमेशा क्षेत्र के विकास को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा है।
संगठन के धरातल पर देखें तो एक आम कार्यकर्ता से लेकर शीर्ष दायित्वों तक उन्होंने अपनी कार्यकुशलता का लोहा मनवाया है। उन्होंने भाजपा में बूथ अध्यक्ष के रूप में अपनी शुरुआत की और इसके बाद न्याय पंचायत अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष और दो बार जिले के उपाध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां बखूबी निभाईं। इसके अलावा वे युवा मोर्चा के जिला मंत्री और भाजपा उत्तराखंड के सह-मीडिया प्रभारी जैसे अहम पदों का भी कुशलतापूर्वक निर्वहन कर चुके हैं। प्रशासनिक और जन प्रतिनिधित्व के मोर्चे पर भी उनका अनुभव शानदार रहा है, जिसमें वे नैनीताल जिले से जिला पंचायत सदस्य, उत्तराखंड शासन में राज्य आंदोलनकारी परिषद के सदस्य और उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक के निदेशक सहित कई गरिमामयी पदों पर आसीन रहे हैं।
उमेश शर्मा को जनसेवा की यह पावन प्रेरणा अपने माता-पिता के उच्च संस्कारों से मिली है। उनके स्वर्गीय पिता श्री मोहन चन्द्र शर्मा जी को क्षेत्र में एक अत्यंत कर्मठ व निष्काम कर्मयोगी के रूप में जाना जाता था, वहीं उनकी माता श्रीमती कमला देवी भी आदर्श व वात्सल्य की अद्भुत मिसाल हैं। माता-पिता से मिले इन्हीं संस्कारों के चलते उन्होंने समाज सेवा को ही अपना परम धर्म मान लिया है। गरीबों और असहायों के दुख-दर्द में वे आधी रात को भी मदद के लिए तत्पर रहते हैं, जिसमें उनकी धर्मपत्नी सहित समस्त पारिवारिक जनों का उन्हें भरपूर सहयोग मिलता है।
वर्ष 2007 से धैर्यपूर्वक अपनी बारी का इंतजार कर रहे उमेश शर्मा इस बार पूरी मजबूती के साथ जनता के बीच अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। उनका मानना है कि लालकुआं विधानसभा क्षेत्र के युवाओं, बुजुर्गों और विशेषकर मातृशक्ति का उन्हें जो अपार स्नेह और समर्थन मिल रहा है, वही उनकी असली पूंजी है। अब पूरे क्षेत्र की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व लालकुआं के इस माटी के लाल और निष्ठावान सिपाही के दशकों लंबे संघर्षों और समर्पण को किस प्रकार सम्मानित करता है।
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