Latest Posts

अपने लक्ष्य को संकीर्ण मत बनाइए, आत्मकेंद्रित मत बनाइए। समाज के लिए, मानवता के लिए, राष्ट्र के लिए लक्ष्य रखिए – उपराष्ट्रपति

  *मातृत्व-पितृत्व-पूरी मानवता के प्रति सबसे बड़ी जिम्मेदारी; बच्चों को अपनी राह स्वयं चुनने दीजिए- उपराष्ट्रपति* *भारत के लिए पिछला दशक विकास और प्रगति का दशक रहा है; वैश्विक व्यवस्था….

पंचायत चुनाव पर लगी रोक हटी

  नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तराखंड में पंचायत चुनावों पर लगी स्थगन (स्टे) को हटा दिया है, जिससे चुनाव प्रक्रिया के लिए अब रास्ता साफ हो गया है। कोर्ट ने राज्य….

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शुभारंभ हुआ बुद्धि बाधित सेवा प्रकल्प

समदृष्टि क्षमता विकास एवं अनुसंधान मंडल (सक्षम) द्वारा आज उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मानसिक दिव्यांगजनों के लिए बुद्धि बाधित सेवा प्रकल्प का शुभारंभ झाझरा स्थित विद्या माता राजरानी मार्ग….

वचन निभाने दो सौ वर्षो से भगवान जगन्नाथ आते हैं मानौरा

  भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का महोत्सव पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है।सारे देश में आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को हर्षोल्लास से रथयात्रा निकाली जाती….

जगन्नाथ का भात, जगत पसारे हाथ

  हिन्दू धर्म की वर्ण व्यवस्था एवं जाति परम्परा की आलोचना करना आज एक फैशन सरीखा हो गया है, पर इस धर्म में कई तीर्थ स्थान ऐसे भी हैं, जहां….

आपातकाल: भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे दुखद और शर्मनाक घटना

(विष्णुदत्त शर्मा-विभूति फीचर्स) “कांग्रेस का लोकतंत्र में विश्वास तब तक है जब तक वह सत्ता में है। जब वह सत्ता से बाहर होती दिखाई देती है, वह संविधान और लोकतंत्र….

आपातकाल में इंदिरा गांधी की भूमिका

  (दिनेश चंद्र वर्मा-विनायक फीचर्स) आपातकाल के वे दिन, भारतीय इतिहास के सर्वाधिक कलुषित दिनों के रूप में याद किए जाएंगे। आपातकाल के नाम पर इस देश में जो तानाशाही….

सत्ता बचाने की हताशा में लिया गया राष्ट्र विरोधी निर्णय था आपातकाल

  आंतरिक अशांति का बहाना बनाकर 25 जून 1975 की आधी रात को देश पर थोपे गए ‘आपातकाल’ को 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। भारत की जनता ने तब….

लेखक को संपादक, कलाकार को निर्देशक निखारता है

  कल्पना कीजिए एक कलम है-शानदार, सुनहरी, और चमकती हुई। पर उसमें स्याही न हो तो वह सुंदर होकर भी निरर्थक है। या फिर मंच पर एक जबरदस्त अभिनेता खड़ा….

वर्तमान युद्ध परिदृश्य में शांति की अवधारणा

  शीत युद्ध की समाप्ति के पश्चात् एक नए शांतिपूर्ण विश्व व्यवस्था के उदय की आशा थी। परन्तु इक्कीसवीं सदी के इस तीसरे दशक में दुनियां एक विडंबनापूर्ण वास्तविकता के….