इज्जतनगर मंडल में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर स्वच्छता पखवाड़ा शुरू, चार श्रेणियों में अलग होगा कचरा
डीआरएम वीणा सिन्हा के मार्गदर्शन में चला अभियान; रेलकर्मियों, वेंडरों और सेवा प्रदाताओं को दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण।
बरेली। भारतीय रेल में स्वच्छता और प्रभावी कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल में ‘स्वच्छता पखवाड़ा-2026’ के तहत व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) सुश्री वीणा सिन्हा के मार्गदर्शन में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के शत-प्रतिशत अनुपालन हेतु विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य रेल परिसरों से निकलने वाले कचरे का स्रोत पर ही वैज्ञानिक निस्तारण और उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना है।
कर्मचारियों और वेंडरों को दी जा रही ट्रेनिंग
अभियान के अंतर्गत रेलवे कर्मचारियों, ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग स्टाफ (OBHS), पैंट्री व कैटरिंग कर्मियों, स्टेशन वेंडरों तथा अधिकृत ठेकेदारों के लिए जागरूकता सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इन सत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों, थोक अपशिष्ट उत्पादकों के दायित्वों और नियमों के उल्लंघन पर लागू होने वाले प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी तय करने के लिए शपथ ग्रहण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, साथ ही स्टेशनों, कार्यालयों और रेलवे कॉलोनियों में जागरूकता पोस्टर व सूचना सामग्री प्रदर्शित की जा रही है।
चार श्रेणियों में कचरे का होगा वैज्ञानिक पृथक्करण
स्टेशनों, ट्रेनों, पैंट्री कार और रेलवे कॉलोनियों में कचरे को उत्पन्न होने के स्थान पर ही चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटने की व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू किया जा रहा है:
* गीला कचरा: बचा हुआ भोजन, छिलके एवं रसोई से निकला अपशिष्ट।
* सूखा कचरा: प्लास्टिक, रद्दी कागज, गत्ता, धातु और कांच की वस्तुएं।
* सैनिटरी कचरा: प्रयुक्त डायपर और सैनिटरी नैपकिन।
* विशेष देखभाल वाला कचरा: उपयोग की गई बैटरियां, फ्यूज बल्ब/ट्यूबलाइट और एक्सपायरी दवाएं।
सैनिटरी और विशेष श्रेणी के घरेलू खतरनाक कचरे के सुरक्षित संग्रहण व निस्तारण के लिए सफाई कर्मियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि स्वास्थ्य और पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
थोक अपशिष्ट उत्पादकों की पहचान और पंजीकरण
नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए इज्जतनगर मंडल के प्रमुख रेलवे स्टेशनों, कार्यशालाओं (वर्कशॉप), रेलवे चिकित्सालय और आवासीय कॉलोनियों में ‘बल्क वेस्ट जनरेटर्स’ (थोक कचरा उत्पादक इकाइयों) की पहचान कर नियमानुसार उनके अनिवार्य पंजीकरण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
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