उत्तर प्रदेश में गौशालाओं की दयनीय स्थिति
(अतिवीर जैन “पराग” – विभूति फीचर्स)
कुछ महीनों पहले मेरठ की सरकारी गौशाला में गोवंश की मौतों पर बवाल मचा तो मंत्री से लेकर संतरी तक सब दौड़ पड़े थे और ऐसा लगा कि उसके बाद सब समाधान हो गया। ऐसा ही हाल बरेली की सरकारी गौशाला कान्हा उपवन का हुआ, जिसमें 11 गोवंश की मौत हो गई। यहां भी मंत्री से लेकर संतरी तक निरीक्षण के लिए दौड़ पड़े। उनके निरीक्षण होते ही ऐसा लगा मानो सब कुछ ठीक हो गया।
पर वास्तविकता क्या है? क्या मंत्री और अधिकारियों के निरीक्षण से प्रदेश के सभी जिलों की गौशालाएं सुधर गईं? क्या ईमानदारी से गोवंश को पूर्ण आहार मिल रहा है? क्या कोई गोवंश बीमार नहीं है? यदि बीमार है तो क्या उसका सही से उपचार हो रहा है? कौन-सा सरकारी पशु चिकित्सक महीने में कितनी बार गौशाला जा रहा है? क्या दवाइयां दे रहा है?
और जब सरकार की गौशालाएं चल ही रही हैं तो मेरठ में माल रोड और बरेली में पीलीभीत रोड पर गोवंश खुले में घूमकर दुर्घटनाओं का सबब क्यों बन रहे हैं? यहां हर समय दस-पंद्रह गायें ग्रैंड ट्यूलिप के सामने बैठी रहती हैं। प्रशासन इन्हें पकड़कर गौशालाओं में क्यों नहीं बंद कर रहा?
वास्तव में प्रदेश के सभी जिलों की गौशालाओं की स्थिति दयनीय ही होगी। जब अखबारों में गोवंश की मौत की कोई घटना छपती है तो सारा शासन-प्रशासन जाग जाता है और उसके बाद फिर सब चैन की नींद सो जाते हैं। मंत्री से संतरी तक सभी की जेबें भरने का सिलसिला फिर चलने लगता है।
प्रदेश की सभी गौशालाओं का पशुधन मंत्री को नियमित निरीक्षण करना चाहिए। हर जिले के डीएम से मासिक रिपोर्ट शासन को आनी चाहिए, जिसमें स्पष्ट रूप से पता चले कि कितनी गौशालाएं हैं, कितने गोवंश किस गौशाला में थे, कितने कम हुए या हर महीने कितने जुड़े, कितने और कहां से आवारा गोवंश घूमते हुए पकड़े गए और अगर आवारा गोवंश को पकड़ने में सरकारी तंत्र नाकाम है तो बजरंग दल या गौ रक्षा दल का भी सहयोग लिया जा सकता है। अगर सरकार के पास जगह और पैसा कम है और गोवंश ज्यादा हैं तो नई गौशालाएं खोली जाएं, जिसके लिए सरकार समाज का सहयोग ले सकती है, क्योंकि गोवंश के नाम पर सनातनी समाज दान देने में बहुत उदार है।
(अतिवीर जैन “पराग” – विभूति फीचर्स)
*(विभूति फीचर्स)*
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