प्रशासन की चुप्पी या तूफान से पहले की शांति? 32 बस्तियों का सब्र टूटा—क्या सड़कों पर तय होगा बिंदुखत्ता का फैसला?

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बिंदुखत्ता। बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम की मांग को लेकर जारी पदयात्रा के 23वें दिन आज यात्रा शांतिनगर से हल्दूधार होते हुए गांधीनगर स्थित भगवती मंदिर पहुंची। यहां रात्रि पड़ाव के बाद कल की पदयात्रा इसी स्थान से शुरू होगी। आज की यात्रा में करीब 1500 ग्रामीण शामिल हुए। जनगीतों और लोकगीतों की धुन पर थिरकते हुए ग्रामीणों ने एकजुटता के साथ राजस्व ग्राम की मांग बुलंद की।

पदयात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर नुक्कड़ सभाएं आयोजित की गईं। वन अधिकार संगठन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भरत नेगी ने कहा कि बिंदुखत्तावासी पीढ़ियों से वनाश्रित हैं और वनाधिकार अधिनियम, 2006 के तहत राजस्व ग्राम की पात्रता रखते हैं। बिंदुखत्ता की 32 बस्तियों/वन ग्रामों के 11,703 दावेदारों द्वारा वनाधिकार अधिनियम की धारा 3(1)(ज) के तहत प्रस्तुत सामुदायिक दावा 19 जून 2024 को जिला स्तरीय वन अधिकार समिति (DLC) द्वारा सर्वसम्मति से पारित कर राजस्व ग्राम की अधिसूचना एवं बंदोबस्ती की कार्यवाही के लिए शासन को भेजा जा चुका है।

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उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्य सचिव राधा रतूड़ी द्वारा भी 21 अक्टूबर 2024 को राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी करने की कार्यवाही के लिए राजस्व सचिव को लिखित निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद अधिसूचना लंबित है, जिसके कारण बिंदुखत्तावासी केंद्र एवं राज्य सरकार की अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं के पूर्ण लाभ से वंचित हैं। उन्होंने सरकार से पदयात्रा के दौरान लगातार दिए जा रहे दस्तावेजों और प्रमाणों का संज्ञान लेकर तत्काल अधिसूचना जारी करने की मांग की।

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वन अधिकार संगठन के संरक्षक रमेश गोस्वामी ने कहा कि बिंदुखत्ता का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही गौलापार में राजस्व ग्राम की मांग को लेकर पदयात्रा कर रहे ग्रामीणों से संपर्क करेगा। दोनों क्षेत्रों को जोड़कर संयुक्त आंदोलन की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर प्रस्तावित रैली को लालकुआं के बजाय गौलापार वासियों के साथ संयुक्त रूप से हल्द्वानी में आयोजित करने पर भी विचार हो रहा है।

आज की पदयात्रा में संगठन के अध्यक्ष उमेश भट्ट, अर्जुन नाथ गोस्वामी,बलवन्त बिष्ट,रमेश गोस्वामी, जीवन पांडेय, मनोज दानू, दीपक जोशी, भरत नेगी, दीपक रौतेला, नंदन बोरा, बलवंत परिहार, सोहन लाल, दौलत सिंह कोरंगा, भुवन शर्मा, कैलाश जोशी, धन सिंह गाड़िया, भूपेश जोशी, भवान सिंह कठायत,सूबेदार कुंदन सिंह रावत,खुशाल सिंह मेहता, त्रिलोक सिंह बिष्ट, लोकपाल सिंह, राम सिंह साह, पान सिंह रावत, राकेश कुनियाल, मदन कुनियाल, दिनेश पुरी, महावीर खत्री, अजीत सिंह, हिम्मत सिंह, कमला देवी, चंद्राकला कुनियाल, रेखा देवी, विनीता कोरंगा, हरकी, देवी, जानकी देवी, खष्टी कोरंगा,हीरा देवी, गंगा देवी, कला देवी, हेमा देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे।