हल्दूचौड़ शिवपुरी के प्रसिद्ध नागेश्वर महादेव मंदिर में इन दिनों भक्ति की एक ऐसी अविरल धारा बह रही है, जिसमें सराबोर होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु खिंचे चले आ रहे हैं। इसी क्रम में श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन एक ऐसा अलौकिक दृश्य देखने को मिला, जिसने आयोजन की दिव्यता को और बढ़ा दिया। खाक चौक अयोध्या के परम पूजनीय महंत देवदास महाराज विशेष रूप से इस ज्ञान यज्ञ में सम्मिलित होने शिवपुरी पहुंचे। उन्होंने नागेश्वर महादेव के दर्शन कर मंदिर परिसर में चल रही कथा का पूरे मनोयोग से श्रवण किया और वहां उपस्थित समस्त भक्तजनों को अपना मंगलमय आशीर्वाद प्रदान किया। महंत जी के आगमन से पूरा पांडल जयकारों से गूंज उठा।
कथा के तीसरे दिन नैमिषारण्य की पावन धरा से पधारे सुप्रसिद्ध कथा वाचक पंडित प्रभात कुमार त्रिपाठी ने अपने मधुर और सुरीले कंठ से भगवान की लीलाओं का ऐसा रसपान कराया कि पांडल में मौजूद हर एक श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गया। पंडित जी की वाणी में एक ऐसा सम्मोहन था कि लोग अपनी सुध-बुध खोकर कथा रस में डूब गए।
अपने सम्बोधन में पंडित प्रभात कुमार त्रिपाठी ने श्रीमद् भागवत महापुराण के तीसरे दिन के प्रसंगों का अत्यंत मार्मिक और विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कथा की शुरुआत करते हुए कहा कि भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि साक्षात श्रीहरि का वांग्मय स्वरूप है। तीसरे दिन की कथा के मुख्य प्रसंगों को समझाते हुए उन्होंने भगवान के दिव्य वराह अवतार की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि जब हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को ले जाकर समुद्र के गर्त में छिपा दिया था, तब धर्म की रक्षा और पृथ्वी के उद्धार के लिए भगवान विष्णु ने महाबली वराह का रूप धारण किया और हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी को पुनः स्थापित किया। कथा व्यास ने इस प्रसंग के माध्यम से यह संदेश दिया कि जब-जब संसार में पाप और अत्याचार बढ़ता है, तब-तब ईश्वर किसी न किसी रूप में दुष्टों के संहार और सज्जनों की रक्षा के लिए अवश्य प्रकट होते हैं।
इसके बाद पंडित जी ने कर्दम ऋषि और देवहूति के विवाह तथा भगवान कपिल के प्राकट्य की कथा को विस्तार से समझाया। उन्होंने कपिल गीता के दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि माता देवहूति को दिया गया भगवान कपिल का सांख्य योग का उपदेश मानव जीवन को मोक्ष की ओर ले जाने वाला सर्वोत्तम मार्ग है। उन्होंने बताया कि भक्ति, वैराग्य और ज्ञान के बिना जीवन अधूरा है। अपनी इंद्रियों को वश में करके निष्काम भाव से ईश्वर की शरण में जाना ही मानव जीवन का परम लक्ष्य होना चाहिए। पंडित जी ने ध्रुव चरित्र की कथा का भी स्पर्श किया, जिसमें उन्होंने बताया कि एक नन्हे बालक ध्रुव ने अपनी अचल भक्ति और दृढ़ संकल्प से कैसे भगवान नारायण को साक्षात प्रकट होने पर विवश कर दिया। पंडित जी के मुखारविंद से इन दिव्य प्रसंगों को सुनकर भक्तों की आंखें सजल हो उठीं।
इस पावन आध्यात्मिक अनुष्ठान के मुख्य यजमान श्रीमती सुमनलता दीक्षित और श्री सुबोध दीक्षित रहे, जिन्होंने पूर्ण विधि-विधान से पोथी पूजन और संतों का स्वागत किया। इस मांगलिक अवसर पर दीक्षित परिवार के अन्य सदस्य श्रीमती पूजा दीक्षित, श्री पंकज दीक्षित, श्रीमती उमा दीक्षित और श्री पवन दीक्षित भी भक्ति भाव से सराबोर नजर आए।
समारोह में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस अवसर पर सर्वश्री बी एस बिष्ट, रिम्पी बिष्ट, सुरेन्द्र बिष्ट, आकाश मिश्रा, विनोद जोशी, दिनेश बोरा, शिव कुमार सिंह, सुशील तिवारी, सोनू बन्ना, दुष्यन्त चौहान, महेश चौधरी, ओम द्विवेद्वी और ईश्वरी दत्त पन्त श्री कृष्ण शुक्ला कुलदीप मिश्रा सैकड़ों की संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे। सभी ने आरती में भाग लेकर महाप्रसाद ग्रहण किया और इस अलौकिक आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति को अपने हृदयों में संजोया।
इधर मंदिर से जुड़े संरक्षक एन एस बिष्ट अध्यक्ष डी एस बिष्ट भूपेन्द्र जोशी सचिव किशन बिष्ट कोषाध्यक्ष हरीश पाण्डे ने अधिक से अधिक संख्या में भक्तों से पहुंचने की अपील की
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