अयोध्या से लालकुआँ पहुंची एक दिव्य अनुभूति, अवंतिका शक्तिपीठ में सदियों पुरानी धूनी के पुनरुद्धार के पीछे छिपा है कौन सा आध्यात्मिक रहस्य?

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लालकुआँ। गुप्त नवरात्रि के पावन और रहस्यमयी अवसर पर आज लालकुआँ का प्रसिद्ध अवंतिका मन्दिर एक अलौकिक आभा से सराबोर हो उठा। मन्दिर प्रांगण में चारों ओर फैली विशेष रौनक और भक्तों का हुजूम किसी बड़े आध्यात्मिक अनुष्ठान की गवाही दे रहा है। अवसर बेहद खास है—मन्दिर परिसर में स्थित सैकड़ों वर्ष प्राचीन और सिद्ध धूनी के जीर्णोद्धार का लोकार्पण। इस ऐतिहासिक और पवित्र घड़ी के साक्षी बनने के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है जो अनवरत जारी है। भक्तों पूरी श्रद्धा और आत्मिक भाव के साथ माँ अवंतिका के चरणों में अपनी आराधना के श्रद्धा पुष्प अर्पित कर रहे है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय जयकारों से गूंज रहा है।
इस धार्मिक उत्सव में आध्यात्मिक गरिमा उस समय और बढ़ गई, जब अयोध्या स्थित सुप्रसिद्ध खाक चौक अखाड़े के मंहत देवदास त्यागी जी महाराज इस पावन बेला में लालकुआँ के अवंतिका शक्ति पीठ पहुंचे हुएं है अयोध्या के इस प्रतिष्ठित संत के आगमन से समारोह में मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। है उन्होंने यहाँ आयोजित विशेष धार्मिक अनुष्ठान और लोकार्पण समारोह में सहभागिता कर आयोजन को और भव्य बना दिया है
समारोह के दौरान उपस्थित विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए अयोध्या के संत महाराज जी ने एक अत्यंत सुंदर, मर्मस्पर्शी और ज्ञानवर्धक प्रवचन दिया। उन्होंने धूनी के गूढ़ रहस्य और गुप्त नवरात्रि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह प्राचीन धूनी केवल अग्नि और भस्म का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह हमारे पूर्वजों और सिद्ध ऋषियों की सदियों की तपस्या, अखंड ऊर्जा और जागृत चेतना का साक्षात केंद्र है। जब कोई ऐसा प्राचीन और सिद्ध स्थान पुनर्जीवित होता है, तो वह संपूर्ण क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। गुप्त नवरात्रि आंतरिक साधना और आत्ममंथन का गुप्त समय है, और ऐसे पावन काल में इस धूनी का जीर्णोद्धार होना इस क्षेत्र के कल्याण और सुख-समृद्धि का एक बड़ा दिव्य संकेत है। महाराज जी ने भक्तों को प्रेरित करते हुए कहा कि अपनी जड़ों, सनातन संस्कृति और आस्था के इन प्राचीन केंद्रों को सहेज कर रखना ही सच्ची ईश्वर सेवा है।
महाराज जी के इस दिव्य संदेश और माँ अवंतिका के अद्भुत दर्शनों से अभिभूत होकर भक्तों ने इस दिन को अपने जीवन की एक अनमोल आध्यात्मिक स्मृति मान लिया है। धूनी के लोकार्पण की प्रक्रिया जारी है के मन्दिर परिसर में भजन-कीर्तन का दौर चल रहा है जिसने हर श्रद्धालु के हृदय को असीम शांति और भक्ति के रस से सराबोर कर दिया है

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