मौत के मुहाने पर ‘तटवर्ती’ बाशिंदे: हर गिरते कगार के साथ टूटती सांसें… क्या जल-समाधि की ओर बढ़ रहा है इन्द्रानगर?( देखिये वीडियो)

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मौत के मुहाने पर ‘तटवर्ती’ बाशिंदे: हर गिरते कगार के साथ टूटती सांसें… क्या जल-समाधि की ओर बढ़ रहा है इन्द्रानगर

बिन्दुखत्ता (नैनीताल):
उफनती नदी की डरावनी गर्जना और हर गुजरते पल के साथ दरकती जमीन—बिन्दुखत्ता के इन्द्रानगर द्वितीय में इन दिनों खौफ का ऐसा पहरा है कि लोग अपनी ही चौखट पर जागकर मौत की आहट सुनने को मजबूर हैं। पहाड़ों पर हो रही मूसलाधार बारिश के बाद गौला नदी के रौद्र रूप ने तटवर्ती इलाकों में तबाही का खेल शुरू कर दिया है। नदी के प्रचंड वेग से हो रहे भीषण भूकटाव ने ग्रामीणों की रातों की नींद छीन ली है और पूरा इलाका जल-प्रलय के मुहाने पर खड़ा नजर आ रहा है।

वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश पलड़िया ने जमीनी हालात पर गहरी चिंता जताते हुए शासन-प्रशासन की सुस्ती पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि गौला के आक्रामक रुख के चलते तटवर्ती क्षेत्र की सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि जलमग्न होकर नदी में समा चुकी है। किसानों की लहलहाती फसलें और आशियाने देखते ही देखते उफनती लहरों का ग्रास बन रहे हैं। स्थिति इतनी नाजुक है कि नदी का तेज बहाव लगातार रिहायशी बस्तियों की ओर बढ़ रहा है।
टार्च की रोशनी में कट रही रातें
इन्द्रानगर द्वितीय के बाशिंदे हाथों में टार्च और लाठियां लेकर पूरी-पूरी रात जागकर पहरा दे रहे हैं। नदी के पानी से जमीन कटकर गिरने की तेज आवाजें ग्रामीणों के दिलों की धड़कनें बढ़ा रही हैं। कई परिवारों ने अनहोनी की आशंका के चलते अपना जरूरी सामान समेटना शुरू कर दिया है, लेकिन सवाल यह है कि वे जाएं तो जाएं कहां?
स्थानीय लोगों में प्रशासन की अनदेखी को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल आपदा सिर पर आने के बाद ही सुरक्षा इंतजामात की सुध ली जाती है। यदि तत्काल प्रभाव से नदी के बहाव को रोकने के लिए पुख्ता सुरक्षा दीवार (पिचिंग) और बोल्डर नहीं डाले गए, तो बिन्दुखत्ता में एक बड़ी मानवीय त्रासदी घटित होने से कोई नहीं रोक पाएगा।

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