विशेष संवाददाता जगतगुरु भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पावन पर्व इस वर्ष अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोगों के बीच मनाया जाएगा। प्रसिद्ध भागवताचार्य डा० नवीन चन्द्र जोशी ने देश-विदेश के समस्त सनातन धर्मावलंबियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक मंगलकामनाएं प्रेषित करते हुए बताया कि इस बार स्मार्त और वैष्णव दोनों संप्रदायों का व्रत एक ही दिन यानी ४ सितंबर, शुक्रवार को रखा जाएगा।
अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और दुर्लभ योग डॉ० नवीन चन्द्र जोशी के अनुसार पंचांग गणना के आधार पर शुक्रवार को अष्टमी तिथि ४५ घटी ४८ पल (सूर्योदय से लेकर मध्यरात्रि १२:१८ बजे तक) व्याप्त रहेगी।
- एक ही दिन व्रत: अर्द्धरात्रि व्यापिनी अष्टमी ४ सितंबर को होने के कारण सभी भक्त एक ही दिन व्रत का अनुष्ठान करेंगे।
- अमृत योग का निर्माण: इस बार रोहिणी नक्षत्र युक्त अष्टमी के साथ हर्षण योग और कौलव करण का अत्यंत फलदायी संयोग पूजन के लिए बन रहा है।
- पूजन का शुभ मुहूर्त: शास्त्रों में श्रीकृष्ण पूजन मध्यरात्रि में करने का विधान है। अतः पूजन का शुभ समय सायं गोधूलि बेला से प्रारंभ होकर मध्यरात्रि १२:१० बजे तक रहेगा।
शास्त्रोक्त पूजन विधि एवं नंदोत्सव भागवताचार्य ने बताया कि जन्माष्टमी पर सर्वप्रथम विघ्नहर्ता श्रीगणेश और दसों दिग्पाल देवताओं का विधिवत पूजन-अर्चन करना चाहिए। इसके पश्चात बाल-गोपाल की प्रतिमा का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शर्करा) से अभिषेक कर दिव्य श्रृंगार करें। भगवान को नाना प्रकार के प्रिय नैवेद्य और भोग अर्पण करने तथा झांकी दर्शन से मनुष्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
भगवान श्रीकृष्ण ने रोहिणी नक्षत्र में माता देवकी और वसुदेव जी के यहां अवतार लिया। तत्पश्चात वसुदेव जी ने प्रभु की आज्ञा से उन्हें गोकुल में नंद बाबा और यशोदा मैया के पास पहुंचाया। इसी परंपरा के अनुसार गोकुल में दूसरे दिन भव्य ‘नंदोत्सव’ मनाया जाता है। अतः शास्त्र सम्मत व्रत ४ सितंबर को और नंदोत्सव अगले दिन धूमधाम से मनाया जाएगा।
‘कृष्णं वन्दे जगद् गुरुम्’—गीता का दिव्य संदेश डॉ० जोशी ने जन्माष्टमी के आध्यात्मिक मर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ही पूर्ण सत्य हैं, जिनकी स्तुति में वेदों ने ‘सत्यं परं धीमहि’ कहा है। प्रभु ने धर्म की संस्थापना, सज्जनों की रक्षा और मानवता के कल्याण हेतु अवतार धारण किया। उन्होंने संसार को श्रीमद्भगवद्गीता रूपी अमृत ज्ञान देकर जीवन जीने की सच्ची राह दिखाई।
भागवताचार्य डॉ० नवीन चन्द्र जोशी ने प्रार्थना की कि योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से सभी भक्तों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और धर्म का दिव्य प्रकाश सदैव बना रहे।
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