लालकुआँ में सियासी पारा चढ़ा: पूर्व विधायक नवीन दुम्का ने भाजपा से ठोकी प्रबल दावेदारी, निष्ठा और जनसंघर्षों के दम पर कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह

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लालकुआँ में सियासी पारा चढ़ा: पूर्व विधायक नवीन दुम्का ने भाजपा से ठोकी प्रबल दावेदारी, निष्ठा और जनसंघर्षों के दम पर कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह

लालकुआँ (नैनीताल):

उत्तराखंड की वीआईपी सीटों में शुमार लालकुआँ विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से टिकट की दौड़ में पूर्व विधायक नवीन दुम्का की सशक्त दावेदारी ने सियासी हलचल तेज कर दी है। भाजपा के बेहद निष्ठावान, कर्मठ और समर्पित सिपाही माने जाने वाले नवीन दुम्का ने पार्टी के भीतर अपनी आधिकारिक दावेदारी पेश कर चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। बेदाग छवि, बेमिसाल सादगी और हर कार्यकर्ता व आम जन के सुख-दुख में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने की आदत के चलते दुम्का की इस दावेदारी को संगठन और जमीनी स्तर पर व्यापक समर्थन मिलता दिख रहा है।

संगठन के प्रति अटूट निष्ठा: भाजपा के सच्चे सिपाही की दावेदारी

नवीन दुम्का का नाम उन चुनिंदा नेताओं में शामिल है जिन्होंने संगठन को हमेशा अपने निजी हितों से ऊपर रखा है। भाजपा में दशकों तक विभिन्न सांगठनिक दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करने वाले दुम्का ने पार्टी की नीतियों और सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लालकुआँ विधानसभा से भाजपा के प्रत्याशी के रूप में उनकी दावेदारी इसलिए भी सबसे मजबूत मानी जा रही है, क्योंकि कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पकड़ गहरी है और वे पार्टी की हर चुनौती में हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे हैं।

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1983 से 1996 का ऐतिहासिक संघर्ष: रोजगार के लिए लड़ी लंबी लड़ाई

नवीन दुम्का केवल चुनावी राजनीति के चेहरे नहीं हैं, बल्कि उनका पूरा जीवन जनसंघर्षों की भट्टी में तपकर निखरा है।

  • केन्द्रीय बेरोजगार संगठन की नींव: वर्ष 1983 से 1996 के दौरान जब क्षेत्र के उद्योगों में स्थानीय युवाओं की अनदेखी हो रही थी, तब उन्होंने ‘केन्द्रीय बेरोजगार संगठन’ के संस्थापक सदस्य के रूप में ऐतिहासिक आंदोलन छेड़ा।
  • स्थानीय युवाओं को रोजगार: उद्योगों में स्थानीय नौजवानों को रोजगार दिलाने के लिए उन्होंने जो ऐतिहासिक और निर्णायक संघर्ष किया, उसकी मिसाल आज भी तराई-भाबर के लोग सम्मान के साथ देते हैं।
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राम मंदिर आंदोलन से लेकर जमरानी बाँध तक: जनहित में झेली जेल की यातनाएँ

सिद्धांतों और जनसरोकारों की रक्षा के लिए नवीन दुम्का ने कभी समझौते की राह नहीं चुनी।

  • राम मंदिर आंदोलन में जेल यात्रा: ऐतिहासिक श्री राम जन्मभूमि आंदोलन में सक्रिय सिपाही के तौर पर उन्होंने जेल की यातनाएँ सहीं और संगठन के आदेश पर हर मोर्चे पर डटे रहे।
  • जमरानी बाँध और किसान हित: क्षेत्र की जीवनरेखा जमरानी बाँध परियोजना को धरातल पर लाने की बात हो या फिर अन्नदाता किसानों के हक की लड़ाई, दुम्का ने हर स्तर पर आवाज उठाई।
  • बुनियादी विकास के लिए सजगता: शिक्षा, स्वास्थ्य, शुद्ध पेयजल और सड़कों के संजाल को दुरुस्त करने के लिए वे हमेशा जनहित के मुद्दों पर शासन-प्रशासन के सामने चट्टान की तरह अड़े रहे हैं।

विधायक रहते सादगी की मिसाल, सत्ता के बाद भी जनता के बीच उपस्थिति

अपने विधायक कार्यकाल के दौरान नवीन दुम्का ने लालकुआँ में अभूतपूर्व विकास कार्य कराए, लेकिन सत्ता कभी उनके आचरण पर हावी नहीं हुई। वे विधायक रहते हुए जितने सहज, सरल और आम जनता के लिए सुलभ थे, कार्यकाल के बाद भी उन्होंने जनता से वही आत्मीय नाता बनाए रखा। हर सुख-दुख में बिना किसी भेदभाव के जनता के बीच मौजूद रहने का उनका यह गुण उन्हें क्षेत्र में बेहद लोकप्रिय बनाए रखता है।

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लालकुआँ में भाजपा के चुनावी समीकरणों में नया मोड़

नवीन दुम्का द्वारा लालकुआँ विधानसभा से भाजपा का झंडा थामने की औपचारिक दावेदारी जताते ही कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हो गया है। स्थानीय जनता और भाजपा कैडर का स्पष्ट मानना है कि एक ईमानदार, संघर्षशील और जमीनी स्तर पर हर दिल अजीज नेता की दावेदारी से पार्टी का जनाधार और अधिक मजबूत होगा। आगामी विधानसभा समर में लालकुआँ से भाजपा के टिकट के लिए नवीन दुम्का की इस प्रबल दावेदारी ने चुनावी मुकाबले को बेहद रोचक बना दिया है।

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