कांडा। पंकज डसीला
कांडा पड़ाव स्थित प्रसिद्ध कालिका मंदिर में आगामी दशहरे मेले की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मेले को लेकर मंदिर परिसर को आकर्षक रूप देने के साथ ही साफ-सफाई और रंगाई-पुताई का कार्य शुरू कर दिया गया है। मंदिर की रंगाई-पुताई का कार्य हरे कृष्ण इंटरप्राइजेज एवं गढ़िया जनरल स्टोर के संचालक सुंदर सिंह गढ़िया और उनके पुत्र नीरज, धीरज व रोहित गढ़िया द्वारा अपने निजी खर्चे से कराया जा रहा है।
मंदिर परिसर की रंगाई-पुताई के लिए 500 लीटर से अधिक पक्का कलर इस्तेमाल किए जाने की तैयारी है। रंगाई-पुताई का कार्य शुरू होने से मंदिर परिसर का स्वरूप निखरने लगा है। दशहरे के अवसर पर कालिका मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और क्षेत्रवासी पहुंचते हैं। ऐसे में मेले से पहले मंदिर को सजाने-संवारने का कार्य स्थानीय स्तर पर शुरू होने से श्रद्धालुओं में भी उत्साह है।
स्थानीय लोगों के अनुसार कांडा पड़ाव का कालिका मंदिर क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। दशहरे के दौरान यहां आयोजित होने वाला मेला लंबे समय से क्षेत्रवासियों के आकर्षण का केंद्र रहा है। मेले में आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज क्षेत्रों से भी लोग पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में होने वाले धार्मिक आयोजनों और मेले को देखते हुए व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का काम भी किया जा रहा है।
अपने खर्चे से करा रहे मंदिर का सौंदर्यीकरण
हरे कृष्ण इंटरप्राइजेज एवं गढ़िया जनरल स्टोर के संचालक सुंदर सिंह गढ़िया तथा उनके पुत्रों नीरज, धीरज और रोहित द्वारा मंदिर की रंगाई-पुताई का खर्च स्वयं वहन किया जा रहा है।
कांडा पड़ाव में पेंट के हरे कृष्णा इंटरप्राइजेज संचालक बीटेक शिक्षित रोहित गढ़िया ने बताया यह मंदिर उनके घर के आगे हैं बचपन से मन में यह इच्छा थी कि मां का मंदिर विभिन्न रंगों से सजाया जाए आज जब माता की कृपा से हमें अवसर प्रदान हुआ तो इसक लिए सर्वश्रेष्ठ डिजाइन तैयार कर जितना सम्भव है इसे सजानें में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
स्थानीय लोगों ने उनके इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए समाज के लोगों का आगे आना सकारात्मक पहल है।
दशहरे मेले को लेकर आने वाले दिनों में मंदिर परिसर में अन्य व्यवस्थाओं को भी अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं की सुविधा, साफ-सफाई और मेले के दौरान व्यवस्था बनाए रखने को लेकर भी तैयारियां तेज होने लगी हैं। कांडा पड़ाव निवासी उमा जोशी भी हर वर्ष अपने खर्च पर करते आई हैं मंदिर की सीढ़ियों में सुंदर ऐपण कलाकृति उनकी भी प्रशंसा स्थानीय लोगों व मंदिर समिति ने की हैं।
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