राम कथा से पहले माँ अवंतिका दरबार पहुँची श्रद्धा की कलश यात्रा, लालकुआँ में जय श्रीराम के जयघोष संग निकली भव्य कलश यात्रा :कलश यात्रा का फल अश्वमेघ यज्ञ के समान : डा० पंकज मिश्रा मयंक

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लालकुआँ।
नगर की अधिष्ठात्री देवी माँ अवंतिका की पावन कृपा से भोला मन्दिर के सम्मुख आयोजित होने जा रही श्रीराम कथा से पूर्व आज लालकुआँ नगर में जय श्रीराम के गगनभेदी जयघोष के साथ विशाल एवं भव्य कलश यात्रा निकाली गई। कथा स्थल से माँ अवंतिका दरबार तक निकली इस कलश यात्रा की शोभा अत्यंत अलौकिक एवं अद्वितीय रही।

श्रीराम कथा के शुभारंभ से पूर्व मुख्य यजमान एवं श्रद्धालु भक्तों ने नगर की ईष्ट देवी माँ अवंतिका के चरणों में शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। माँ अवंतिका की आराधना के साथ प्रारम्भ हुई यह यात्रा आध्यात्मिक चेतना और भक्ति भाव से ओतप्रोत एक स्मरणीय आयोजन बन गई।

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कलश यात्रा में सैकड़ों मातृशक्तियाँ सिर पर मंगल कलश धारण किए श्रद्धा और संयम के साथ चल रही थीं, वहीं बड़ी संख्या में पुरुष, युवा एवं बाल भक्त नृत्य करते हुए प्रभु श्रीराम की कृपा और यश का गुणगान कर रहे थे। नगर का वातावरण राममय हो उठा और सम्पूर्ण क्षेत्र भक्तिरस में सराबोर दिखाई दिया।

कलश यात्रा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रसिद्ध कथावाचक डा० पंकज मिश्रा मयंक ने कहा कि हिन्दू सनातन परम्परा में किसी भी पूजा या अनुष्ठान में मंगल कलश की स्थापना अनिवार्य मानी गई है। बड़े यज्ञ, यागादि एवं धार्मिक अनुष्ठानों में पुत्रवती सधवा महिलाएँ मंगल कलश लेकर शोभायात्रा में सम्मिलित होती हैं। इस प्रक्रिया में सृजन और मातृत्व की संयुक्त आराधना होती है, जो कलश यात्रा का सबसे बड़ा आध्यात्मिक पक्ष है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में कलश यात्रा का पुण्यफल अश्वमेघ यज्ञ के समान बताया गया है।

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डा० मिश्रा ने समुद्र मंथन की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि समुद्र जीवन, दिव्यता और असंख्य रत्नों का केन्द्र है, और इसी से कलश की पवित्र परम्परा जुड़ी हुई है। माँ अवंतिका की कृपा से सम्पन्न यह कलश यात्रा नगर के धार्मिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में स्मरण की जाएगी।

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माँ अवंतिका के जयकारों और श्रीराम नाम के संकीर्तन के साथ सम्पन्न हुई यह कलश यात्रा श्रद्धा, आस्था और सनातन संस्कृति की जीवंत मिसाल बनकर नगरवासियों के हृदय में अमिट छाप छोड़ गई।

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