संस्कार, साधना और सफलता: नायब तहसीलदार बनीं शिवांगी बिष्ट, उपहार में मिली ‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ बनी प्रेरणा का पावन प्रतीक

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लालकुआँ मेहनत जब संस्कारों और निष्ठा की राह पर चलती है, तो सफलता का आँगन खुशियों की सुगंध से महक उठता है। ऐसा ही गौरवमयी पल क्षेत्र के लिए उस समय आया जब आईटीसी पेपर मिल में सेवारत श्री दीवान सिंह बिष्ट एवं उनकी धर्मपत्नी की होनहार सुपुत्री शिवांगी बिष्ट ने अपनी प्रतिभा के दम पर नायब तहसीलदार बनकर पूरे नगर और क्षेत्र का मान बढ़ाया।

शिवांगी की इस शानदार उपलब्धि का समाचार मिलते ही उनके घर पर बधाई और मंगलकामनाओं का तांता लग गया। परिवार, पड़ोसियों और क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने घर पहुँचकर शिवांगी को फूल-मालाओं और मिठाइयों के साथ अपना स्नेहिल आशीर्वाद दिया। बड़े-बुजुर्गों ने उनके यशस्वी और कल्याणकारी जीवन की प्रार्थना की।

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‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ पुस्तक बनी शक्ति और न्याय का पावन संदेश

इस मंगल उत्सव में विशेष आकर्षण का केंद्र रही युवा समाजसेवी रघुबीर सिंह रजवार द्वारा भेंट की गई ‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ पुस्तक। शिवांगी के उज्ज्वल और मंगलमयी भविष्य की कामना करते हुए उन्होंने यह आध्यात्मिक व प्रेरक पुस्तक सप्रेम उनके हाथों में सौंपा।

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उपहार में दी गई यह पावन पुस्तक केवल पन्नों का संकलन नहीं, बल्कि प्रशासनिक सेवा के नए अध्याय में न्याय, कर्तव्यनिष्ठा और जन-कल्याण की राह दिखाने वाला मार्गदर्शक प्रतीक बनकर उभरी। जैसे माँ अवंतिका शक्ति, करुणा, संरक्षण और सत्य का स्वरूप हैं, वैसे ही एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में शिवांगी भी समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और सेवा पहुँचाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ें—यही भाव इस पावन भेंट के केंद्र में झलका।

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शिवांगी की इस स्वर्णिम सफलता से पूरे क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। लोगों का कहना है कि एक साधारण परिवेश से निकलकर लगन और निष्ठा के बल पर मुकाम हासिल करने वाली शिवांगी क्षेत्र की तमाम बेटियों के लिए प्रेरणा का नया उजाला बन चुकी हैं।

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