बेरीपड़ाव (नैनीताल)
निकटवर्ती महालक्ष्मी मंदिर के समीप नवनिर्मित प्रतिष्ठान ‘होटल उदय बाखई’ के प्रांगण में इन दिनों अलौकिक आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है। आयोजक गोपाल गोस्वामी एवं नन्दन गोस्वामी के पूज्य माता-पिता की पावन स्मृति और शिव-शिवा के आशीर्वाद से 01 नवम्बर से 07 नवम्बर 2026 तक आयोजित सात दिवसीय ‘शत चण्डी याग एवं श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ’ के चलते समूचा क्षेत्र धर्म और आस्था के रंग में सराबोर नजर आ रहा है।
इस दिव्य अनुष्ठान का विधिवत शुभारंभ कार्तिक कृष्ण पक्ष सप्तमी को प्रातः 8:00 बजे एक भव्य एवं नयनाभिराम मंगल कलश यात्रा के साथ हुआ। कलश यात्रा में क्षेत्र की मातृशक्ति और धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। पीले वस्त्रों में सजी सैकड़ों महिलाओं ने जब सिर पर पावन जल से भरे मंगल कलश धारण कर क्षेत्र की परिक्रमा की, तो शंखनाद, वैदिक मंत्रोच्चार और ढोल-नगाड़ों की थाप पर वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। ‘राधे-राधे’ और ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी जयघोष के बीच जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर कलश यात्रा का भावभीना स्वागत किया। पहले ही दिन उमड़े इस अपार जनसैलाब ने आयोजन की दिव्यता को ऐतिहासिक बना दिया।
कलश यात्रा के उपरांत व्यासपीठ पर आसीन प्रख्यात कथाव्यास, प्रस्थानत्रय भाष्यकार पद्मविभूषण स्वामी रामभद्राचार्य के कृपापात्र शिष्य पं. मनोज कृष्ण जोशी ने अपनी ओजस्वी व सुमधुर वाणी से अमृतमयी भागवत कथा का शुभारंभ किया।
कथा के प्रथम दिन मनोज कृष्ण जोशी ने श्रीमद् भागवत के महात्म्य पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि कलियुग में भागवत भगवान श्रीकृष्ण का साक्षात वाङ्मय स्वरूप है। इस पावन कथा के श्रवण मात्र से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के संचित पापों का क्षय हो जाता है। उन्होंने भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के प्राकट्य और उनके कष्ट निवारण का प्रसंग सुनाते हुए गोकर्ण-धुंधुकारी प्रसंग का मार्मिक निरूपण किया। उन्होंने समझाया कि प्रेत योनि में भटक रहे पापी धुंधुकारी को भी जब सात गांठों वाले बांस में बैठकर भागवत कथा सुनने का सुअवसर मिला, तो सातवें दिन उसका उद्धार हो गया और उसे दिव्य धाम की प्राप्ति हुई। यह प्रसंग सिद्ध करता है कि सच्ची श्रद्धा और एकाग्रता से किया गया भागवत श्रवण घोर पापी जीव को भी भवसागर से पार उतार देता है।

द्वितीय दिवस की कथा में व्यासपीठ से सृष्टि के विस्तार, वराह अवतार और राजा परीक्षित के पावन चरित्र का अद्भुत एवं भावपूर्ण वर्णन किया गया। मनोज कृष्ण जोशी ने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान विभिन्न स्वरूपों में अवतरित होकर धर्म की पुनर्स्थापना और भक्तों की रक्षा करते हैं। उन्होंने हिरण्याक्ष वध, वराह प्राकट्य और कर्दम-देवहूति संवाद के माध्यम से जीवन के आध्यात्मिक मूल्यों को समझाया। इसके पश्चात उन्होंने राजा परीक्षित को कलि के प्रभाववश श्रृंगी ऋषि द्वारा मिले सात दिन में तक्षक दंश से मृत्यु के श्राप का अत्यंत सजीव चित्रण किया। उन्होंने कहा कि मृत्यु प्रत्येक देहधारी के लिए अटल सत्य है, लेकिन परीक्षित ने श्राप से भयभीत होने के बजाय राजपाट त्यागकर मां गंगा के तट पर शुकदेव के चरणों में शरण ली। भागवत रूपी नौका ही जीव को मृत्यु के भय से मुक्त कर परम गति के द्वार तक पहुंचाती है। कथा के दौरान प्रस्तुत भावपूर्ण भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए।
यज्ञ समिति के अनुसार, प्रतिदिन प्रातः 08:00 बजे से 11:00 बजे तक नित्य पूजन व शत चण्डी महायाग का वैदिक विधान संपन्न हो रहा है, जबकि दोपहर 01:00 बजे से सायं 05:00 बजे तक कथा का प्रवाह चल रहा है। आगामी 06 नवम्बर 2026 को पावन धनतेरस के दिन ‘होटल उदय बाखई’ का भव्य शुभारंभ संपन्न होगा। वहीं, 07 नवम्बर 2026 को दोपहर 01:00 बजे पूर्णाहुति, व्यास पूजन एवं पुस्तक पूजन संपन्न किया जाएगा, जिसके तुरंत बाद दोपहर 02:00 बजे से विशाल महाप्रसाद एवं भंडारे का आयोजन होगा।
कार्यक्रम के आयोजक गोपाल गोस्वामी एवं नन्दन गोस्वामी ने समस्त धर्मप्रेमी जनता, मातृशक्ति और क्षेत्रवासियों से विनम्र अपील की है कि वे इस अलौकिक अनुष्ठान में अधिक से अधिक संख्या में सपरिवार पधारें और व्यासपीठ से बह रही ज्ञानगंगा में डुबकी लगाकर अपने जीवन को कृतार्थ करें।
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