चतुर्थ वर्ष के श्री रामलीला महोत्सव को लेकर राजीवनगर प्रथम में कौतूहल और उत्साह चरम पर, पात्रों के पूर्वाभ्यास से गूंज उठी धर्मनगरी
बिन्दुखत्ता: क्या इस बार बिन्दुखत्ता की धरती पर प्रभु श्री राम की लीला का ऐसा मंचन होने जा रहा है, जिसकी गूंज पूरे क्षेत्र में लंबे समय तक सुनाई देगी? श्री रामलीला कमेटी राजीवनगर प्रथम द्वारा आयोजित चतुर्थ वर्ष के ‘श्री रामलीला मंचन-2026’ को लेकर छाई उत्सुकता कुछ ऐसा ही संकेत दे रही है। क्षेत्र में इस समय भक्ति, कौतूहल और उत्साह का अनूठा माहौल बना हुआ है। हर शाम मंचन स्थल पर संवादों की गूंज और पात्रों के सधे हुए अभिनय को देखकर दर्शकों में यह जानने की बेचैनी बढ़ गई है कि इस बार के मंचन में ऐसा क्या खास और विहंगम होने वाला है।
दिन-रात पसीना बहा रहे कलाकार, पूर्वाभ्यास में दिखा प्रतिभा का जलवा
मंचन को भव्य, जीवंत और मनोहारी स्वरूप देने के लिए विभिन्न पात्र दिन-रात कड़े पूर्वाभ्यास में जुटे हुए हैं। प्रभु श्री राम के शांत-गंभीर भाव, माता सीता का सौम्य तेज, लक्ष्मण का भ्रातृ-प्रेम व शौर्य, और दशानन रावण की गर्जना को जीवंत करने के लिए कलाकार अपनी प्रतिभा का अद्वितीय प्रदर्शन कर रहे हैं। संवाद अदायगी से लेकर मंच सज्जा तक, हर पहलू को बारीकी से तराशा जा रहा है ताकि दर्शक हर एक दृश्य में स्वयं को त्रेतायुग की पावन भूमि पर अनुभव कर सकें।
समिति के पदाधिकारियों का साझा संकल्प
तैयारियों का जायजा लेते हुए श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष नन्दन तुलेड़ा, प्रबंधक विनोद सिंह बिष्ट तथा संगठन मन्त्री पूरन बिष्ट ने संयुक्त रूप से बताया कि चौथे वर्ष का यह आयोजन पहले से कहीं अधिक भव्य और तकनीकी व कलात्मक रूप से अनूठा होगा।
इस अवसर पर सुंदर खर्कवाल, चंचल कोरंगा, गोविन्द गड़िया और धन सिंह गड़िया सहित समिति के अन्य प्रमुख सदस्यों ने जानकारी साझा करते हुए कहा कि प्रभु श्री राम की लीला को जन-जन के हृदय तक पहुंचाने और इसे अत्यंत मनमोहक बनाने के लिए सभी कलाकार व सहयोगी बिना थके समर्पित भाव से जुटे हैं। समिति का उद्देश्य केवल अभिनय प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि हर एक दृश्य में दिव्यता और मर्यादा का जीवंत संचार करना है।
प्रभु श्री रामलीला का शाश्वत महत्व
रामलीला केवल एक धार्मिक मंचन या नाट्य-उत्सव नहीं, बल्कि मानवीय जीवन के सर्वोच्च मूल्यों का सजीव दिग्दर्शन है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जब नैतिक मूल्य और पारिवारिक मर्यादाएं संकट में हैं, तब प्रभु श्री राम का चरित्र समाज को दिशा दिखाता है:
- मर्यादा और आदर्श: यह कथा सिखाती है कि पुत्र, भाई, पति और राजा के रूप में कर्तव्यों का निर्वहन कैसे किया जाए।
- असत्य पर सत्य की विजय: रावण के अहंकार का अंत इस बात की शाश्वत याद दिलाता है कि अधर्म चाहे कितना भी शक्तिशाली दिखे, अंतिम विजय धर्म और सत्य की ही होती है।
- त्याग और निष्ठा: पिता के वचन के लिए राजपाट का त्याग और विषम परिस्थितियों में भी धैर्य न खोना ही रामलीला का मूल दर्शन है।
बिन्दुखत्ता के राजीवनगर प्रथम में चल रही इन तैयारियों ने पूरे क्षेत्र को राममय कर दिया है। अब धर्मप्रेमियों और दर्शकों की निगाहें उस घड़ी पर टिकी हैं, जब पर्दा उठेगा और श्रद्धा, आस्था व कला का यह अद्भुत संगम मंच पर साकार होगा।
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