उत्तराखंड
सत्य साधक विजेन्द्र पाण्डे गुरुजी ने कलयुग की सामाजिक एवं नैतिक गिरावट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि वर्तमान समय में अनेक लोग अपनी विद्या और बुद्धि का उपयोग सेवा व सद्मार्ग के बजाय केवल अनधिकृत धनार्जन का साधन बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग दूसरों की चुगली, निंदा और भ्रम फैलाकर न केवल पाप अर्जित कर रहे हैं, बल्कि समाज में अपनी ही सामाजिक प्रतिष्ठा का क्षरण भी कर रहे हैं।
गुरुजी ने अपने जारी व्यक्तव्य में कहा कि सरल व सीधे लोगों का बौद्धिक शोषण कर उन्हें भ्रमित करना गंभीर अधर्म है। इस प्रवृत्ति के कारण धार्मिक एवं साधक प्रवृत्ति के लोगों के प्रति भी समाज में संदेह की दृष्टि उत्पन्न हो रही है, जिससे कुल मिलाकर पूरे समाज का नुकसान हो रहा है।
उन्होंने चेताया कि जब विद्या अहंकार और लोभ का माध्यम बन जाती है, तब वह कल्याण के स्थान पर विनाश का कारण बनती है। ऐसे समय में व्यक्ति का विवेक डगमगाने लगता है और धर्म का स्वरूप भी विकृत हो जाता है।
सत्य साधक विजेन्द्र पाण्डे गुरुजी ने कहा कि इस कलियुगी वातावरण में यदि किसी को स्वयं को, समाज को और धर्म को सुरक्षित रखना है, तो “नाम जप” ही एकमात्र अचूक साधन है। नाम-स्मरण से मन शुद्ध होता है, विवेक जागृत होता है और व्यक्ति पाप मार्ग से स्वतः दूर रहता है।
उन्होंने सभी श्रद्धालुओं और समाज के लोगों से आह्वान किया कि वे दिखावे, भ्रम और लालच से दूर रहकर नित्य नाम जप, सत्संग और सदाचार को अपनाएं, तभी कलयुग के प्रभाव से बचा जा सकता है और समाज का वास्तविक कल्याण संभव है।
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