लालकुआँ / हल्द्वानी (विशेष संवाददाता):
क्षेत्र के प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता टी.आर. आर्या (जिन्हें क्षेत्रवासी स्नेह से ‘सागर भाई’ के नाम से जानते हैं) को आज उनके हल्द्वानी स्थित आवास पर पावन धार्मिक ग्रंथ ‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ सप्रेम भेंट की गई। माँ अवंतिका मंदिर के मुख्य आचार्य पं. चन्द्र शेखर जोशी ने उनके आवास—कोहली गार्डन, निकट टिक्कू मॉडर्न स्कूल—पहुंचकर उन्हें यह पुस्तक भेंट की और आशीर्वाद प्रदान किया।
मूल रूप से लालकुआँ के वार्ड नंबर 2 (गांधीनगर) निवासी टी.आर. आर्या की यह पावन धरती जन्मभूमि रही है। अपनी माटी से निरंतर जुड़े रहते हुए सागर भाई ने सामाजिक सरोकारों, जनहित के कार्यों और असहायों की सेवा में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है। क्षेत्र में उनके इसी अतुलनीय योगदान और सेवाभाव के सम्मान स्वरूप आचार्य पं. चन्द्र शेखर जोशी ने उन्हें माँ भगवती के स्वरूप और महिमा पर आधारित यह पुस्तक भेंट कर उनके दीर्घायु व यशस्वी जीवन की कामना की।
पुस्तक भेंट करते हुए आचार्य पं. चन्द्र शेखर जोशी ने कहा कि समाज में निस्वार्थ भाव से सेवा करने वाले व्यक्तित्व ही वास्तव में देवभूमि की सांस्कृतिक व आध्यात्मिक धरोहर को आगे बढ़ाते हैं।
माँ अवंतिका की महिमा पर सागर भाई के विचार
पुस्तक प्राप्त करने के उपरांत समाजसेवी टी.आर. आर्या ‘सागर भाई’ ने आचार्य जी का आभार व्यक्त करते हुए माँ अवंतिका के प्रति अपनी गहरी आस्था प्रकट की। उन्होंने कहा:
> “माँ आदि शक्ति अवंतिका केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि शक्ति, करुणा और लोक-कल्याण की शाश्वत प्रेरणा हैं। देवभूमि का कण-कण देवीय शक्ति से अभिमंत्रित है, और माँ अवंतिका की कृपा ही हम सभी को समाज सेवा के मार्ग पर निस्वार्थ भाव से आगे बढ़ने का आत्मबल देती है।
> आज के दौर में जब युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से दूर हो रही है, ऐसे समय में माँ भगवती के स्वरूप, इतिहास और आध्यात्मिक महत्व को संजोने वाली ‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ जैसी पुस्तकें समाज के लिए प्रकाश-स्तंभ का कार्य करती हैं। धर्म और संस्कृति हमें मानव मात्र से प्रेम और सेवा सिखाते हैं; जब तक हम अपनी लोक-संस्कृति और अध्यात्म से जुड़े रहेंगे, तब तक समाज में समरसता और संवेदना जीवित रहेगी। सच्चे मन से की गई नर सेवा ही माँ भगवती की सच्ची आराधना है।”
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इस गरिमामय भेंट के दौरान दोनों के मध्य क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहरों के संवर्धन तथा धार्मिक चेतना के विस्तार पर भी सार्थक विचार-विमर्श हुआ। क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोगों ने सागर भाई को इस पावन पुस्तक की प्राप्ति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके सामाजिक कार्यों की सराहना की है।
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