पूर्ववर्ती सरकारों ने केवल छल और आश्वासन दिया; प्रशासनिक प्रक्रियाओं में थोड़ा समय अवश्य लगता है, पर समाधान तय—शीघ्र मिलेगी खुशखबरी।
लालकुआं:
बिन्दुखत्ता को राजस्व क्षेत्र घोषित करने की वर्षों पुरानी मांग को लेकर क्षेत्रवासियों का धैर्य अब आंदोलन का रूप ले चुका है। भारी बारिश और प्रतिकूल मौसम के बीच सड़कों पर उतरे जनसैलाब—जिसमें बुजुर्ग, महिलाएं, युवा और छोटे-छोटे बच्चे शामिल रहे—ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दशकों की उपेक्षा से जनता त्रस्त हो चुकी है।
इस संवेदनशील मुद्दे पर धामी सेना के प्रदेश अध्यक्ष, प्रमुख राज्य आंदोलनकारी एवं उत्तराखंड भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के वरिष्ठ सदस्य तरुण पंत ने एक विशेष भेंटवार्ता में बिन्दुखत्तावासियों की भावनाओं का पुरजोर समर्थन करते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में इसका ठोस और स्थाई समाधान निकलेगा।
पहाड़ के पसीने और संघर्ष की पहचान है बिन्दुखत्ता
श्री तरुण पंत ने कहा कि बिन्दुखत्ता में बसी जनता देवभूमि की देवतुल्य जनता है, जिन्होंने अपने खून-पसीने और कड़ी मेहनत से इस क्षेत्र को आबाद कर एक सशक्त समाज का रूप दिया है। यहां पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा और चंपावत जैसे दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों से आए हमारे अपने लोग बसे हैं। उनका दर्द सिर्फ उनका नहीं, बल्कि प्रत्येक उत्तराखंडी और राज्य आंदोलनकारी का साझा दर्द है। अपने ही राज्य में हमारे पर्वतीय भाई-बहनों को यदि उनका वाजिब हक और न्याय नहीं मिलेगा, तो किसे मिलेगा? पूर्ववर्ती सरकारों ने बार-बार सिर्फ कोरे आश्वासन देकर इस संवेदनशील समस्या को लटकाए रखा, जिससे जनता में यह आक्रोश उपजा है।
“तिवारी जी ने बसाया, धामी जी संवारेंगे”
श्री पंत ने जोर देकर कहा:
“स्व. पंडित नारायण दत्त तिवारी जी ने बिन्दुखत्ता को बसाया था, और अब हमारे युवा व संवेदनशील मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी इसे संवारने का कार्य करेंगे।”
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी जन-जन की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए समर्पित हैं और उनके पास हर जटिल विषय का व्यावहारिक निदान है। बिन्दुखत्ता के प्रकरण को राजस्व क्षेत्र के दायरे में लाने हेतु शासन स्तर पर पूरी संवेदनशीलता से प्रयास जारी हैं।
प्रशासनिक प्रक्रिया में समय लगना स्वाभाविक, पर देर है अंधेर नहीं
तरुण पंत ने बिन्दुखत्ता की जनता से संयम व विश्वास बनाए रखने की भावुक अपील करते हुए कहा कि किसी भी क्षेत्र को राजस्व दर्जा दिलाने में कानूनी, वन भूमि और शासकीय स्तर पर कागजी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। इसमें थोड़ा समय लगना स्वाभाविक है, लेकिन अब देर है अंधेर नहीं—जल्द ही क्षेत्रवासियों को बहुप्रतीक्षित खुशखबरी मिलेगी।
उन्होंने अंत में सभी से आह्वान किया कि उत्तराखंड के समग्र विकास और जनभावनाओं का सम्मान करने वाले यशस्वी युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हाथों को मजबूत करें, ताकि जनआकांक्षाओं के अनुरूप एक सशक्त और आत्मनिर्भर उत्तराखंड का निर्माण हो सके।
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