• उत्तराखण्ड में परिसीमन जनसंख्या के आधार पर नहीं, क्षेत्रफल की आधार पर हो: डॉ शिवानी पाण्डेय
संसद के आगामी मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण बिल को बिना शर्त लागू करने की मांग के साथ आज कार रोड चौराहा बिंदुखत्ता में अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन “ऐपवा” द्वारा एक बैठक का आयोजन किया गया।
दिल्ली से पहुंची ऐपवा राष्ट्रीय सचिव श्वेता राज ने कहा कि, मोदी सरकार महिलाओं को 33% महिला आरक्षण देने में टाल मटोल कर रही है। भाजपा सरकार महिला आरक्षण बिल को परिसीमन से जोड़कर पूरे देश में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करना चाहती है। पिछले संसद सत्र में संसद में विपक्ष तथा सड़क पर महिला संगठनों ने इसका पुरजोर विरोध किया और भाजपा सरकार के साम्प्रदायिक एजेंडे को पीछे धकेला। आज देश में एकजुट होकर महिला आरक्षण बिल को बिना शर्त लागू करने की मांग उठाने तथा इसी मानसून सत्र में इसे लागू कराने के लिए दबाव बनाने की जरूरत है।
ऐपवा की उत्तराखण्ड संयोजक डॉ शिवानी पाण्डेय ने कहा कि, महिला संगठनों की मांग है कि महिलाओं को आरक्षण के सवाल पर बिना किसी किंतु परन्तु के साथ 2029 के लोकसभा चुनाव और उस से पहले राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में इसे लागू किया जाय। उत्तराखण्ड में परिसीमन को जनसंख्या के आधार पर नहीं बल्कि क्षेत्रफल की आधार पर किया जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो पहाड़ी राज्य में न तो पहाड़ के मुद्दों को महत्वपूर्ण जगह मिल पाएगी और न ही मजबूरी में शहरों की तरफ आए लोगों की समस्याओं को सुलझा पाएंगे। महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ते जा रहे है, लेकिन सरकार इन सवालों को अपराध और न्याय का मामला न बनाकर सांप्रदायिक मामला बन रही है। जिसके खिलाफ एकजुट हो कर लड़ने की बहुत जरूरत है।
ऐपवा नैनीताल जिला संयोजक विमला रौथाण ने कहा कि, बेटी पढ़ाओ- बेटी बचाओ का नारा लगाने वाली भाजपा सरकार अंकिता भंडारी को न्याय के सवाल पर पूरी तरह से आरोपियों के पक्ष में खड़ी है। राज्य की महिलाओं और आम जनता के लगातार आंदोलन के बावजूद आज तक आरोपी वीआईपी जेल में नहीं हैं और उन्हें अपने अपने संगठनों में बड़े पदभार भी दिए जा रहे है। आंकड़े बता रहे हैं कि हिमालयी राज्यों में उत्तराखण्ड महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा असुरक्षित राज्यों में शामिल है।
निर्मला शाही ने कहा कि, राज्य में महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसके खिलाफ महिलाओं को संगठित होने की जरूरत है।
ऐपवा की पहलकदमी पर आगामी 20-21 जुलाई को महिला आरक्षण बिल को बिना शर्त लागू करने की मांग के साथ देश भर में प्रदर्शन किया जायेगा। इसके अनुपालन में 21 जुलाई को लालकुआं तहसील पर धरना-प्रदर्शन करते हुए महिला आरक्षण लागू करने की मांग पर केंद्रीय कानून मंत्री को ज्ञापन भेजा जायेगा.
बैठक में श्वेता राज, डॉ शिवानी पाण्डेय, विमला रौथाण, निर्मला शाही, शशि गड़िया, अनीता अन्ना, मेहरुनिशा, रुखसाना, आरती, डॉ कैलाश पाण्डेय, कमल जोशी, नैन सिंह कोरंगा, धीरज कुमार आदि शामिल रहे।
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