गंगोलीहाट की माटी का वो लाल, जो बीहड़ पहाड़ों में सिसकती सांसों का मसीहा बन गया: कौन हैं वो ‘रियल लाइफ फाइटर’, जिन्होंने दो ज़िलों और तीन अस्पतालों को एक साथ थामकर रच दिया इंसानियत का नया इतिहास?
रुद्रपुर/देवभूमि के दुर्गम पहाड़ों की सर्द हवाओं में जब किसी गरीब, असहाय की सांसें लड़खड़ाती हैं, तब वहां केवल दवा काम नहीं करती—वहां किसी ऐसे फरिश्ते की जरूरत होती है जिसका दिल मरीज की हर धड़कन के साथ धड़कता हो। पहाड़ की पथरीली पगडंडियों से लेकर दूर-दराज के अस्पतालों तक, आज हर जुबान पर एक ही सवाल और एक ही नाम कौंध रहा है: आखिर कौन है वह शख्स, जिसने लोहाघाट चिकित्सालय में तैनाती के दौरान अपनी थकान, अपनी नींद और अपनी सीमाओं को भुलाकर एक साथ तीन-तीन अस्पतालों और दो-दो जिलों की जिंदगी को अपने मजबूत कंधों पर थाम लिया?
यह प्रेरक और दिल को छू लेने वाली कहानी है पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट से ताल्लुक रखने वाले, उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक व प्रख्यात रेडियोलॉजिस्ट डॉ. ललित मोहन रखोलिया की—एक ऐसे चिकित्सक, जिनके लिए डॉक्टरी कोई पेशा नहीं, बल्कि ईश्वरीय पूजा और आंसुओं को पोंछने का आजीवन संकल्प है।
फौजी पिता के संस्कार और मां का दुलार: ऐसे तराशा गया सेवा का संकल्प
डॉ. ललित मोहन रखोलिया की जड़ों में हिमालय की मिट्टी की वही खुशबू और अडिग निष्ठा रची-बसी है, जो कभी झुकना नहीं सिखाती। मूलतः पिथौरागढ़ जनपद के गंगोलीहाट से जुड़े डॉ. रखोलिया का जन्म नैनीताल जिले के देवल चौड़ गांव में हुआ था। घर में अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ाने वाले पिता नंद किशोर रखोलिया भारतीय सेना में रहकर वतन की सेवा कर रहे थे, तो वहीं ममतामयी मां ने घर संभालते हुए उन्हें संस्कारों की वह अनमोल पूंजी दी, जिसने उनके भीतर करुणा का अथाह समंदर भर दिया।
बचपन की शुरुआती शिक्षा प्राथमिक विद्यालय झलुआजाला के साधारण से प्रांगण में हुई। इसके उपरांत राजकीय इंटर कॉलेज कालाढूंगी से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की और आगरा डिग्री कॉलेज से प्रथम श्रेणी में स्नातक की डिग्री हासिल की। बचपन से ही उनके मन में एक ही सपना पलता था—एक ऐसा डॉक्टर बनना, जो केवल मर्ज का इलाज न करे, बल्कि बेबसों के टूटे हुए दिलों का संबल बने।
इस सपने को नई उड़ान तब मिली जब उन्होंने बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर से अपनी एम.बी.बी.एस. (MBBS) की पढ़ाई पूरी की और फिर सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज, आगरा से रेडियोलॉजी में परास्नातक (MD) की उपाधि प्राप्त की।
दुर्गम घाटियों से हल्द्वानी तक: हर मोड़ पर सिर्फ और सिर्फ मरीजों का दर्द
लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित परीक्षा उत्तीर्ण कर जब डॉ. रखोलिया राजकीय सेवा में आए, तो उन्होंने सुगम शहरों के बजाय पहाड़ के बीहड़ और दुर्गम अंचल को गले लगाया। अल्मोड़ा जनपद के सुदूरवर्ती प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ‘ध्यारी’ में उनकी प्रथम नियुक्ति हुई। विषम भौगोलिक परिस्थितियों और बेहद सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने लगभग 7 वर्षों तक निष्काम भाव से मरीजों की सेवा की।
इसके बाद उनका स्थानांतरण शोबन सिंह जीना बेस चिकित्सालय, हल्द्वानी (नैनीताल) हुआ, जहां 6 वर्षों तक उन्होंने हजारों मरीजों की जांच और उपचार में रात-दिन एक कर दिया।
हल्द्वानी के बाद उनकी तैनाती राजकीय उप जिला चिकित्सालय, लोहाघाट में हुई। यह लोहाघाट और सीमांत चंपावत का वह स्वर्णिम दौर था, जिसे क्षेत्रीय जनता कभी नहीं भूल सकती। जब चारों तरफ संसाधनों व चिकित्सकों का अभाव था, तब डॉ. रखोलिया ने अपनी थकान की परवाह किए बिना एक साथ तीन अस्पतालों और दो जिलों में निरंतर दौड़-दौड़ कर अपनी सेवाएं दीं। रात हो या दिन, आंधी हो या तूफान—मरीजों की एक पुकार पर डॉ. रखोलिया देवदूत बनकर खड़े नजर आते थे। लगभग 7 वर्ष लोहाघाट में सेवा का अद्वितीय इतिहास रचने के बाद उनका स्थानांतरण राजकीय उप जिला चिकित्सालय टनकपुर हुआ, जहां आज भी उनका समर्पण उसी निष्ठा और ऊर्जा के साथ अनवरत जारी है।
मानवीय गुणों की अद्भुत मिसाल: जरूरतमंदों के लिए हर घड़ी खुला रहता है दिल का दरवाज़ा
डॉ. रखोलिया सिर्फ स्टेथस्कोप और आधुनिक मशीनों से जांच करने वाले डॉक्टर भर नहीं हैं, बल्कि वे जीते-जागते मानवीय संवेदनाओं के जीवंत स्तम्भ हैं। चिकित्सालय की दहलीज पर जब कोई लाचार, निर्धन या बेसहारा मरीज पहुंचता है, तो डॉ. रखोलिया की भूमिका केवल एक अधिकारी या चिकित्सक तक सीमित नहीं रहती, वे उसके आत्मीय परिजन बन जाते हैं।
दूर-दराज के बीहड़ गांवों से किराए के पैसे जुटाकर पहुंचे असहाय तीमारदारों की दवाइयों की व्यवस्था करनी हो, जांच की सुलभ राह बनानी हो या किसी गरीब की जेब खाली देखकर खुद आगे बढ़कर संबल देना हो—डॉ. रखोलिया ने कभी किसी जरूरतमंद को मायूस नहीं लौटने दिया। उनके लिए पद और प्रोटोकॉल कभी इंसानियत से बड़े नहीं रहे। दिन हो या आधी रात, यदि किसी जरूरतमंद ने संकट में पुकारा, तो डॉ. रखोलिया अपनी पूरी व्यस्तताओं को दरकिनार कर मदद के लिए तत्पर खड़े मिले। मरीजों के आंसुओं को मुस्कान में बदल देना और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को सम्मान व उपचार देना ही उनके जीवन का सबसे बड़ा धर्म रहा है।
लोकगीतों से लेकर शासन तक: जब नतमस्तक हुआ पूरा समाज
डॉ. रखोलिया की इस निस्वार्थ साधना ने पहाड़ के हर तबके को इतना भावविभोर किया कि वरिष्ठ लोकगायक श्री नागेंद्र जोशी ने चिकित्सा क्षेत्र में उनके इस बेमिसाल योगदान पर एक कुमाऊंनी गीत तक समर्पित कर दिया—जो किसी भी चिकित्सक के लिए जनमानस का सर्वोच्च पुरस्कार है।
सच्ची कर्मठता की गूंज शासन से लेकर जनता के दिलों में किस कदर पहुंची, इसकी गवाही उन्हें मिले अनगिनत सम्मान देते हैं:
* राज्य का सर्वोच्च नेतृत्व व प्रशासन: उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी एवं स्वास्थ्य मंत्री उत्तराखंड सरकार द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया गया। चंपावत के कर्मठ जिलाधिकारियों—श्री सुरेन्द्र नारायण पांडे, श्री नरेंद्र सिंह भंडारी, श्री विनीत तोमर और श्री नवनीत पांडे द्वारा भी उन्हें प्रशासनिक पटल पर विशिष्ट सम्मान दिया गया।
* कोरोना काल के अजेय योद्धा: जब महामारी में पूरी दुनिया सहमी हुई थी, तब अग्रिम मोर्चे पर डटे रहने के लिए उन्हें मुख्य चिकित्सा अधिकारी चंपावत, मुख्य चिकित्सा अधिकारी पिथौरागढ़, मुख्य चिकित्साधीक्षक महिला अस्पताल पिथौरागढ़, दैनिक जागरण हल्द्वानी तथा नगरपालिका अध्यक्ष लोहाघाट द्वारा ‘कोरोना वॉरियर’ के रूप में सिर-माथे पर बिठाया गया।
* जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संस्थाओं का प्यार: लोहाघाट के माननीय विधायक श्री पूरण सिंह फर्त्याल, टनकपुर में माननीय विधायक (स्व.) श्री कैलाश चंद्र गहतोड़ी, मुख्य चिकित्साधीक्षक टनकपुर, नगरपालिका हल्द्वानी, नगरपालिका लोहाघाट, नगरपालिका टनकपुर, व्यापार मंडल लोहाघाट, व्यापार मंडल अध्यक्ष टनकपुर, आशा संगठन चंपावत की अध्यक्ष, सामाजिक संगठन लोहाघाट तथा हरेला क्लब टनकपुर ने उनके सेवाभाव का अभिनंदन किया।
* सांस्कृतिक, सेनानी एवं जनसेवा मंच: रामलीला कमेटी लोहाघाट, स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन चंपावत व टनकपुर, पुनर्नवा महिला समिति हल्द्वानी, अभिनय एवं नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला नई दिल्ली (हल्द्वानी में आयोजित), शिवसेना युवा सेना हल्द्वानी, स्वर्गीय श्रीमती ऊषा गुप्ता जन सेवा समिति हल्द्वानी, भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय जी की जयंती पर आयोजित गरिमामयी समारोह, प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ उत्तराखंड, सेलनेट कार्यशाला हल्द्वानी, शरदोत्सव मेला समिति हल्द्वानी, गणेश महोत्सव शिव मंदिर कमेटी हल्द्वानी और प्राचीन शिव मंदिर समिति हल्द्वानी ने उन्हें श्रद्धा और सम्मान से नवाजा।
* ‘रियल लाइफ फाइटर’: इंसानियत की जंग को हर पल जीतने के लिए उन्हें (वादोकाई कराटे एसोशिएशन ) द्वारा प्रतिष्ठित ‘रियल लाइफ फाइटर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया।
डॉ. ललित मोहन रखोलिया आज उन तमाम युवाओं और चिकित्सकों के लिए एक जीती-जागती मिसाल हैं, जो यह साबित करते हैं कि सेवा पद की सीमाओं से नहीं, बल्कि पीड़ा को महसूस करने वाले संवेदनशील दिल से होती है। पहाड़ों की सर्द वादियों में जब भी कोई मां अपने बच्चे की सलामती की दुआ मांगती है, तो डॉ. रखोलिया का चेहरा उम्मीद की किरण बनकर सामने आ जाता है।
@ रमाकान्त पन्त @
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