हल्द्वानी:
सांसारिक सुख-साधनों की अंधी दौड़ में भटकते मानव मन को परम शांति की अनुभूति कब और कैसे होती है? यह एक ऐसा गूढ़ रहस्य है, जिसका उत्तर शास्त्रों में केवल ‘निस्वार्थ समर्पण और सेवा’ बताया गया है। जब भक्ति में निश्छलता और कर्म में परोपकार घुल जाता है, तो ईश्वर की कृपा पाने के लिए साधक को कहीं भटकना नहीं पड़ता, बल्कि ईश्वरीय आशीष स्वयं चलकर उसके द्वार तक पहुँचता है। इसी आध्यात्मिक सत्य का सजीव उदाहरण तब देखने को मिला, जब लालकुआँ स्थित जाग्रत शक्ति पीठ ‘अवंतिका शक्ति स्थल’ के मुख्य आचार्य स्वयं चलकर एक भक्त के आंगन पहुँचे।
माँ अवंतिका शक्ति स्थल के प्रति अनन्य आस्था और अटूट निष्ठा रखने वाले राजेंद्र नगर (हल्द्वानी) निवासी विपिन गुप्ता के आवास पर पहुँचकर मंदिर के मुख्य आचार्य पं. चन्द्रशेखर जोशी ने उन्हें पावन ग्रंथ ‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ सप्रेम भेंट कर सम्मानित किया। मंदिर परंपरा में यह अपने आप में एक दुर्लभ और अत्यंत गरिमामय क्षण रहा, जब शक्ति धाम के प्रधान पुरोहित ने स्वयं भक्त की देहरी पर जाकर माँ का प्रसाद स्वरूप यह ग्रंथ सौंपा।
मानवता और सनातन संस्कृति की जीवंत मिसाल: विपिन गुप्ता
विपिन गुप्ता केवल एक धर्मपरायण व्यक्तित्व ही नहीं, अपितु उच्च आध्यात्मिक चेतना और मानवीय करुणा के संवाहक हैं। सनातन धर्म और संस्कृति के प्रति उनकी सजगता केवल विचारों तक सीमित न रहकर उनके आचरण में झलकती है। वे ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ के मूलमंत्र को आत्मसात कर दीन-दुखियों, निर्धनों और असहायों की सहायता के लिए हर समय तत्पर रहते हैं। समाज में किसी पीड़ित के आंसू पोंछना और चुपचाप बिना किसी प्रचार के परोपकार करना उनकी दैनिक साधना का अभिन्न अंग बन चुका है।
शक्ति धाम के कायाकल्प में अमूल्य योगदान
विपिन गुप्ता के आवास पर उनके योगदान की सराहना करते हुए आचार्य पं. चन्द्रशेखर जोशी ने कहा:
“माँ अवंतिका का दरबार कोटि-कोटि भक्तों की आस्था का केंद्र है। इस पावन शक्ति स्थल के विकास, नवनिर्माण, सौंदर्यीकरण और आध्यात्मिक व्यवस्थाओं के विस्तार में विपिन गुप्ता का योगदान अद्वितीय और अविस्मरणीय रहा है। उन्होंने मंदिर के हर सेवा कार्य को व्यक्तिगत दायित्व मानकर निष्काम भाव से पूर्ण किया है। ऐसे समर्पित कर्मयोगियों के द्वार पर साक्षात माँ भगवती का आशीष पहुँचना निश्चित ही ईश्वरीय विधान है।”
सच्ची भक्ति कर्म के रूप में झलकती है: नमन जोशी
इस पावन प्रसंग पर अपने विचार साझा करते हुए नमन जोशी ने कहा:
“भक्ति की सार्थकता मात्र अनुष्ठानों में नहीं, बल्कि मन की निर्मलता और कर्म की पवित्रता में छिपी है। जब मनुष्य का हृदय दूसरों के कष्ट देखकर द्रवित होने लगे और उसके हाथ स्वतः सेवा के लिए उठ जाएं, तब ईश्वर की समीपता का अनुभव होता है। विपिन गुप्ता का जीवन इसी निस्वार्थ साधना का दर्पण है।”
ईश्वर के श्रीचरणों के अतिरिक्त संसार में कहीं सुख नहीं: श्री राम जी लाल गुप्ता
इस अवसर पर उपस्थित वरिष्ठ समाजसेवी श्री राम जी लाल गुप्ता ने सभी को अपना स्नेहिल आशीर्वाद प्रदान करते हुए जीवन के सबसे गहन सत्य को उजागर किया। उन्होंने कहा:
“मनुष्य उम्र भर सांसारिक उपलब्धियों, धन-वैभव और प्रतिष्ठा में सुख तलाशता रहता है, किंतु यह सब मृगतृष्णा के समान क्षणिक है। इस नश्वर जगत के समस्त भ्रमों से परे, आत्मा की वास्तविक तृप्ति और शाश्वत आनंद केवल और केवल परमात्मा के श्रीचरणों में ही सुलभ है। जिसने अपने जीवन की बागडोर ईश्वर के चरणों में सौंप दी, उसे संसार का कोई अभाव विचलित नहीं कर सकता।”
विपिन गुप्ता के आवास पर आयोजित इस गरिमामय एवं भावपूर्ण अवसर पर सौरभ शर्मा, नमन जोशी, संजय कुमार आर्या, मनीष चौहान, चेतन अरोरा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी प्रबुद्धजनों ने विपिन गुप्ता को इस सम्मान के लिए बधाई देते हुए माँ अवंतिका से उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और मंगलमय जीवन की प्रार्थना की।
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