आग लगने पर ही क्यों याद आता है कुआं? फाइलों में दफन लापरवाही या कुछ और?

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हर वर्ष बरसात के मौसम में प्याज की आपूर्ति में कमी होने से उसके मूल्य में वृद्धि हो जाती है । लेकिन बार-बार ऐसा होने पर भी सरकार इससे कुछ सबक नहीं लेती और मूल्य वृद्धि होने के बाद जागती है। चीनी के भी मूल्य बढ़ने के बाद सरकार को चीनी का आयात करना याद आया । जिसको आने में समय लगेगा और तब तक के लिए बड़े मूल्य नागरिकों को देने होंगे । प्याज का अगर सरकार के पास बफर स्टॉक है तो उसे सही समय पर निकाल दिया जाना चाहिए था। जिससे प्याज के दाम नहीं बढ़ते। कृषि प्रधान देश होने के बावजूद हमें दलहन और तिलहन का अभी भी आयात करना पड़ता हैं।
आजादी के 80 साल होने के बाद भी हम क्यों नहीं दलहन और तिलहन की खुद की पैदावार इतनी कर पा रहे हैं , जिससे हमें बाहर से ना मंगाना पड़े ।
वैसे तो हमारी सरकारी मशीनरी को हमेशा ही आग लगने पर पानी के लिए कुआं खोलने की आदत पड़ी हुई है । जिसे बदलना होगा । मूल्यों के नियंत्रण का कार्य सिर्फ केंद्र सरकार नहीं कर सकती इसमें राज्य सरकारों को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। फसलों के उत्पादन,वितरण ,जमाखोरी, और मुनाफाखोरी पर निगाह रखनी होगी और समय पर कार्यवाही करनी होगी।

(इंजी.अतिवीर जैन “पराग”-विभूति फीचर्स)

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*(लेखक रक्षा मंत्रालय के पूर्व उपनिदेशक हैं।)* *(विनायक फीचर्स)*

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