जब नश्वर देह त्याग कर बैकुंठ धाम की यात्रा पर निकलीं ‘माँ कौशल्या’: खजान गुड्डू के जीवन से ओझल हुआ ममतामयी वटवृक्ष; 27 अगस्त को हल्द्वानी में पीपलपानी विधान

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ममता; वात्सल्य की मूरत के निधन से गंगोलीहाट से हल्द्वानी तक शोक की लहर, सांसद कुमारी सैलजा ने भेजा भावुक पत्र
हल्द्वानी / गंगोलीहाट 
संसार में माँ केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि वह वटवृक्ष होती है जिसकी छांव में पूरा परिवार और समाज अपनी सारी थकान, विपदाएं और दर्द भूल जाता है। जब वह छांव अचानक उठ जाए, तो जो सूनापन छूटता है, उसकी भरपाई वर्षो तक संभव नहीं होती। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व विधानसभा प्रत्याशी खजान चंद्र गुड्डू के जीवन का सबसे मजबूत संबल, उनकी पूज्य माताजी श्रीमती कौशल्या देवी (80 वर्ष) बीते 16 अगस्त को इस नश्वर संसार को अलविदा कहकर देवलोक गमन कर गईं।
उनके महाप्रयाण की खबर से न केवल उनका परिवार बल्कि समूचा गंगोलीहाट और बेरीनाग क्षेत्र स्तब्ध है। चारों तरफ बस यही चर्चा है कि गरीबों, बेसहारों और जरूरतमंदों के सिर पर ममता भरा हाथ रखने वाली साक्षात ‘अन्नपूर्णा’ और ‘मसीहा’ आज मौन हो गई हैं।
पहाड़ जैसा जीवन, आँसुओं से सींचा गया संघर्ष
मूल रूप से बेरीनाग के सुरम्य बिलकोट क्षेत्र की रहने वाली कौशल्या देवी जी का जीवन संघर्ष और त्याग की ऐसी जीती-जागती गाथा रहा है, जिसे सुनकर किसी का भी हृदय भर आए। नियति ने उनकी परीक्षा लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अपने भरे-पूरे जीवन में उन्होंने अपने दो बेटों को खोने का असहनीय वज्रपात सहा। एक माँ के लिए उसकी संतानों का बिछोह दुनिया का सबसे भारी गम होता है, मगर कौशल्या देवी जी ने इस अथाह पीड़ा को भी ईश्वरीय विधान मानकर अपने भीतर समेट लिया।
वे टूटीं नहीं, बल्कि अपने आंसुओं को उन्होंने समाज की सेवा और वात्सल्य में बदल दिया। उनके जीवन साथी स्वर्गीय श्री हरीश लाल जी पहाड़ के एक मूर्धन्य साहित्यकार और संवेदनशील कवि थे, जिनकी कविताओं में हिमालय की महक और प्रकृति का निश्छल प्रेम झलकता था। माता कौशल्या देवी और पिता हरीश लाल जी के इन्हीं पावन संस्कारों ने उनके परिवार को गढ़ा। आज वे अपने पीछे दो पुत्र, एक पुत्री और नाती-पोतों से भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं।
माँ के संकल्प को बनाया जीवन का मिशन: 20 वर्षों की अनवरत जनसेवा
माँ कौशल्या देवी को पहाड़ की लोक-संस्कृति, माटी और यहाँ के सीधे-सादे लोगों से अगाध स्नेह था। अपनी पूज्य माताजी की इसी अभिलाषा को शिरोधार्य मानकर उनके सुपुत्र खजान चंद्र गुड्डू ने गंगोलीहाट क्षेत्र को अपनी कर्मभूमि चुना। पिछले दो दशकों से वे गंगोलीहाट के दुर्गम गांवों में दीन-दुखियों की सेवा में दिन-रात समर्पित रहे हैं। खजान गुड्डू जब भी जनसेवा के लिए निकलते, माँ की दी हुई आशीष ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनती थी। आज जब वे समाज और जनता के अधिकारों की सेवा में तत्पर हैं, तो माँ का भौतिक रूप से न होना उनके लिए जीवन की सबसे अपूरणीय क्षति बन गया है।
कांग्रेस आलाकमान ने साझा किया दर्द: सांसद कुमारी सैलजा का भावुक पत्र

श्रीमती कौशल्या देवी जी के देहावसान पर राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने भी गहरा दुख जताया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की महासचिव एवं सांसद कुमारी सैलजा ने खजान चंद्र गुड्डू जी को एक विशेष शोक संदेश पत्र भेजकर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।
पत्र में सांसद सैलजा ने लिखा:
 “प्रिय श्री खजान चंद्र गुड्डू जी, आपकी प्रिय माता श्रीमती कौशल्या देवी जी के निधन की जानकारी सुनकर मुझे अत्यंत दुःख हुआ। दुःख की इस घड़ी में मैं आप सब के साथ हूँ और ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ कि आप व आपके परिवार को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे।”

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आठवें दिन दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि, बयानों में छलका दर्द
निधन के आठवें दिन भी हल्द्वानी स्थित उनके आवास पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा। समाज के हर वर्ग—राजनीति, कला, संस्कृति और अध्यात्म जगत—से जुड़े लोगों ने पहुंचकर अपनी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रसिद्ध फिल्म निर्माता एवं निर्देशक विक्की योगी के भावुक भरे शब्द
“माँ कौशल्या देवी जी केवल खजान भाई की माँ नहीं थीं, वे हम सबके लिए साक्षात ममता और करुणा की प्रतिमूर्ति थीं। जब भी उनसे मिलने का सौभाग्य मिला, उनके चेहरे का वह दिव्य तेज और सिर पर फेरा गया हाथ सारी चिंताओं को हर लेता था। उन्होंने जीवन के इतने बड़े-बड़े दुःखों को हंसते हुए झेला, उनका जाना पहाड़ की ममतामयी आत्मा के चले जाने जैसा है। यह शून्य कभी नहीं भरा जा सकता।”

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राज्य मंत्री दिनेश आर्या का हृदयस्पर्शी उद्गार:
“माताजी का पूरा जीवन निष्काम कर्म, त्याग और परोपकार की एक खुली किताब था। गरीबों और जरूरतमंदों के लिए उनके दरवाजे सदैव खुले रहते थे। आज के दौर में जब लोग स्वार्थ की दौड़ में लगे हैं, माताजी ने अपने दोनों पुत्रों को जनसेवा और समाज कल्याण के लिए प्रेरित किया। उनका महाप्रयाण पूरे उत्तराखंड समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। मैं उस पुण्यात्मा के चरणों में कोटि-कोटि नमन करता हूँ।”

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27 अगस्त को होगा ‘पीपलपानी संस्कार’
दिवंगत पुण्यात्मा की आत्मिक शांति के लिए 27 अगस्त को उनके हल्द्वानी स्थित निजी आवास पर पारंपरिक ‘पीपलपानी’ संस्कार विधि-विधान के साथ संपन्न होगा।
माँ भले ही देह रूप में विदा हो गई हों, लेकिन उनके दिए संस्कार, उनका असीम वात्सल्य और समाज सेवा की जलाई गई ज्योति उनके पुत्र खजान गुड्डू और क्षेत्र की जनता के दिलों में सदैव प्रज्वलित रहेगी।
ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में मोक्ष प्रदान करें। ॐ शांति!

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