​त्रिशक्ति का रहस्य: जहाँ युधिष्ठिर ने पाया था विजय का वरदान

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​त्रिशक्ति का रहस्य: जहाँ युधिष्ठिर ने पाया था विजय का वरदान
​मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले में लखुंदर नदी के पावन तट पर स्थित नलखेड़ा का माँ बगलामुखी मंदिर मात्र एक देवालय नहीं, बल्कि अनंत ऊर्जा का वह केंद्र है जहाँ आज भी पौराणिक काल की प्रतिध्वनियाँ सुनाई देती हैं। इसे विश्व का प्राचीनतम और प्रथम बगलामुखी शक्तिपीठ माना जाता है, जिसकी महिमा का गान स्वयं सेवक कुन्दन सोनी, यज्ञाचार्य पण्डित दिलीप शर्मा और पण्डित मनोज शर्मा जैसे अनन्य भक्त करते आए हैं।
​महाभारत काल का वह गुप्त अनुष्ठान
​लोक मान्यताओं और पौराणिक आख्यानों के अनुसार, जब पांडव महाभारत के भीषण युद्ध की विभीषिका के सम्मुख खड़े थे, तब भगवान श्रीकृष्ण के परामर्श पर महाराज युधिष्ठिर ने इसी स्थान पर माँ बगलामुखी की आराधना की थी।
​विजय का संकल्प: कहा जाता है कि माँ के आशीर्वाद से ही पांडवों को वह शक्ति प्राप्त हुई, जिसने अधर्म का विनाश कर धर्म की स्थापना की।
​स्वयंभू प्रतिमा: यहाँ विराजित माँ की प्रतिमा को ‘स्वयंभू’ माना जाता है, जिसकी आभा मात्र के दर्शन से अंतर्मन के भय का नाश हो जाता है।
​अद्वितीय स्वरूप: तीन मुखों वाली ममतामयी शक्ति
​नलखेड़ा स्थित माँ बगलामुखी की प्रतिमा अत्यंत दुर्लभ और विस्मयकारी है। माँ यहाँ तीन मुखों के साथ विराजमान हैं, जिन्हें ‘सर्व स्वरूपा’ कहा जाता है।
​महाकाली: शत्रुओं और तामसिक प्रवृत्तियों का दमन करने वाली।
महालक्ष्मी: सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य प्रदान करने वाली।
महासरस्वती: बुद्धि, विवेक और ज्ञान की प्रदाता।
​”माँ के इस दरबार में जो भी प्राणी अपने श्रद्धा पुष्प निर्मल भाव के साथ अर्पित करता है, उसके समस्त रोग, शोक, दुःख, दरिद्र एवं महाभयानक विपत्तियों का क्षण भर में हरण हो जाता है।”
​आध्यात्मिक महत्ता और तांत्रिक रहस्य
​बगलामुखी को ‘पीताम्बरा’ भी कहा जाता है। यहाँ पीले रंग का विशेष महत्व है। माँ को पीला रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए यहाँ पूजन सामग्री से लेकर वस्त्रों तक सब कुछ स्वर्णिम आभा लिए होता है।
​लखुंदर नदी का सानिध्य: नदी के तट पर स्थित होने के कारण यहाँ की प्राकृतिक और आध्यात्मिक ऊर्जा का संतुलन अद्भुत है।
​सिद्ध पीठ: विश्व भर में माँ बगलामुखी के कई मंदिर हैं, लेकिन नलखेड़ा की आध्यात्मिक महत्ता सर्वाधिक है क्योंकि इसे माता का प्रथम स्थान माना जाता है। यहाँ किए गए अनुष्ठान, विशेषकर ‘हवन’ और ‘जाप’, कभी निष्फल नहीं जाते।
​भक्तों की आस्था का अटूट संगम
​भक्त बताते हैं कि नलखेड़ा का यह दरबार करुणा और ममता का सागर है। यहाँ न केवल आम श्रद्धालु बल्कि विशिष्ट जन भी अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं। माता का स्मरण मात्र ही फलदायी माना गया है।
​ नलखेड़ा की माँ बगलामुखी वह शक्ति हैं जो अपने भक्त की वाणी को बल, शत्रु को पराजय और जीवन को सार्थकता प्रदान करती हैं। यदि आपके मन में अटूट विश्वास और भाव निर्मल है, तो माँ की ममता का आंचल आपकी हर विपत्ति को ढकने के लिए सदैव तत्पर रहता है।
​जय माँ पीताम्बरा!

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