पंडित हर गोविंद पंत जिला चिकित्सालय, अल्मोड़ा में पिछले लगभग दो माह से एक भी फिजिशियन चिकित्सक उपलब्ध न होने से स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। इस गंभीर संकट को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट संजय कुमार पाण्डे ने शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने माननीय राज्यपाल, मुख्य सचिव तथा महानिदेशक (चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) को पत्र भेजकर अस्पताल में रिक्त चल रहे दोनों फिजिशियन पदों पर तत्काल तैनाती की पुरजोर मांग की है।
संजय कुमार पाण्डे ने कहा कि जिला मुख्यालय के मुख्य अस्पताल में पिछले दो महीनों से एक भी फिजिशियन का न होना स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पूर्व में तैनात फिजिशियन डॉ. हरीश आर्य के स्थानांतरण के बाद से अब तक विभाग ने किसी नए चिकित्सक की नियुक्ति नहीं की है, जिसका सीधा खामियाजा रोज सैकड़ों की संख्या में पहुंच रहे निर्दोष मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
अधिकारियों से वार्ता बेअसर, सीएम हेल्पलाइन तक पहुंचा मामला
संजय पाण्डे ने बताया कि इस जनहित से जुड़े मामले को लेकर वह पूर्व में जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्साधिकारी अल्मोड़ा से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर वस्तुस्थिति से अवगत करा चुके हैं। अधिकारियों के समक्ष वैकल्पिक व्यवस्था और तत्काल नियुक्ति की गुहार लगाई गई थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर कोई ठोस समाधान न निकलने के बाद अब शासन स्तर और राजभवन का दरवाजा खटखटाया गया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई गई है।
इलाज के लिए 6 किमी की दौड़, मेडिकल कॉलेज पर भी भारी दबाव
अस्पताल में फिजिशियन न होने के कारण गंभीर एवं जटिल रोगों से पीड़ित बुजुर्गों, महिलाओं और दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। रूटीन परामर्श के अलावा ऑपरेशन से संबंधित कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। मजबूरन मरीजों को लगभग 6 किलोमीटर दूर मेडिकल कॉलेज की दौड़ लगानी पड़ रही है। चिंताजनक स्थिति यह है कि मेडिकल कॉलेज में भी वर्तमान में केवल एक फिजिशियन प्रो. अशोक कुमार ही कार्यरत हैं, जिसके चलते वहां भी मरीजों का भारी दबाव बना हुआ है।
चौखुटिया पर मुखर, तो जिला मुख्यालय पर राजनीतिक दल चुप क्यों?
संजय पाण्डे ने राजनीतिक दलों के दोहरे रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि अल्मोड़ा में हजारों जिंदगियों से जुड़े इस मुद्दे पर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब चौखुटिया प्रकरण सामने आया था तब विपक्षी दलों ने जमकर बयानबाजी और विरोध किया था, लेकिन जिला मुख्यालय के सबसे बड़े अस्पताल में 60 दिनों से डॉक्टर न होने पर यह खामोशी समझ से परे है। जनता अब पूछ रही है कि पर्वतीय क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर शासन और राजनीतिक नेतृत्व की प्राथमिकता आखिर क्या है?
मांगें पूरी न होने पर बड़े जनआंदोलन की चेतावनी
संजय पाण्डे ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह किसी दल या व्यक्ति पर आरोप लगाने का विषय नहीं, बल्कि आमजन के जीवन रक्षा का सवाल है। उन्होंने शासन से मांग की कि:
* जिला चिकित्सालय में रिक्त दोनों फिजिशियन पदों पर तत्काल स्थायी नियुक्ति की जाए।
* स्थायी नियुक्ति होने तक फौरी तौर पर वैकल्पिक व्यवस्था के तहत डॉक्टर तैनात किए जाएं।
* ठप पड़ी ऑपरेशन व अन्य विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं को फौरन बहाल किया जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासन-प्रशासन ने इस दिशा में तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए, तो स्थानीय जनता और सामाजिक संगठनों को लामबंद कर शांतिपूर्ण एवं व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की होगी।
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