कठिन हिमालयी चढ़ाई के बिना पन्याली में होते हैं केदारनाथ जी की स्वयंभू पिण्डी के दिव्य दर्शन; हैड़ाखान बाबा के तपोबल से प्रकट हुए थे देवाधिदेव महादेव
विशेष रिपोर्ट: रमाकान्त पन्त
हल्द्वानी / लालकुआँ: समुद्र तल से 3584 मीटर की विषम ऊँचाइयों और दुर्गम रास्तों को पार कर जिस ज्योतिर्लिंग केदारनाथ के दर्शन के लिए देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु रुद्रप्रयाग पहुँचते हैं, क्या आपको पता है कि उन्हीं देवाधिदेव महादेव की वैसी ही अलौकिक स्वयंभू पिण्डी देवभूमि के प्रवेश द्वार हल्द्वानी में भी साक्षात प्रतिष्ठित है?
अधिकांश लोगों की नज़रों से ओझल यह पावन तीर्थ हल्द्वानी के पन्याली (कठघरिया) स्थित श्री 1008 हैड़ाखान बाबा आश्रम परिसर में स्थित है। पौराणिक महत्व और चमत्कारी ऊर्जा समेटे यह धाम प्रचार-प्रसार के अभाव में आज भी मुख्य पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान की प्रतीक्षा कर रहा है।
हताश भक्तों की पुकार पर प्रकट हुए थे महादेव
कहा जाता है कि जब योगिराज बाबा हैड़ाखान इस क्षेत्र में साधना करते थे, तब उस दौर में पैदल और दुर्गम रास्तों के कारण कई वृद्ध, अशक्त और साधनविहीन भक्त चाहकर भी केदारनाथ धाम नहीं पहुँच पाते थे। अपने भक्तों की गहरी निष्ठा और असमर्थता को देखकर बाबा हैड़ाखान ने महादेव की विशेष स्तुति और आवाहन किया। बाबा की अनन्य केदार-भक्ति के फलस्वरूप पन्याली के इस शिवालय में भगवान केदारनाथ स्वयंभू पिण्डी के रूप में साक्षात प्रकट हुए। यहाँ स्थापित पिण्डी का स्वरूप मुख्य केदारनाथ धाम के पावन विग्रह के समान ही मनोहारी और दर्शनीय है।
स्कंद पुराण और शास्त्रों में केदार महिमा
‘हिमालये तु केदारं’ की महिमा का बखान करते हुए स्कंद पुराण के केदारखण्ड में स्वयं महादेव माता पार्वती से कहते हैं:
‘‘क्षेत्राणां च तथा प्रोक्तं क्षेत्रं केदारसंज्ञितम!’ अर्थात जिस प्रकार सभी नदियों में गंगा और पर्वतों में हिमालय श्रेष्ठ है, उसी प्रकार समस्त क्षेत्रों व तीर्थों में ‘केदार क्षेत्र’ सर्वोपरि है।
उत्तराखण्ड के पंचकेदार—तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मद्महेश्वर, कल्पेश्वर और मुख्य केदारनाथ धाम के साथ-साथ मानसखण्ड में वर्णित थल केदार, पाताल केदार और पाताल भुवनेश्वर के केदारमण्डल की तरह ही हल्द्वानी का यह धाम भी अगाध श्रद्धा का केंद्र है।
असाध्य रोगों से मुक्ति और मनोकामना पूर्ति का केंद्र
मंदिर के व्यवस्थापक और आस्थावान भक्त महेश चन्द्र सुयाल का कहना था कि इस पावन स्थली पर जाप, अनुष्ठान और यज्ञ का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। असाध्य रोगों के निवारण, मानसिक शांति और बिगड़े कार्यों को संवारने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु यहाँ विशेष पूजा-अर्चना करवाते हैं। प्राकृतिक छटा से आच्छादित यह मंदिर हल्द्वानी-कालाढूंगी मार्ग पर कठघरिया चौराहे से कुछ ही दूरी पर उत्तर दिशा में स्थित है।
लालकुआँ के श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, लिया आशीर्वाद
हाल ही में लालकुआँ से पहुँचे श्रद्धालुओं के एक दल ने पन्याली स्थित हैड़ाखान मंदिर व केदारनाथ दरबार के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की। दर्शन करने वाले प्रमुख श्रद्धालुओं में दिनेश अग्रवाल, मदन मधुकर, रविन्द्र यादव और अभिषेक सिंह आदि शामिल रहे।
श्रद्धालुओं ने इस पावन धाम की दिव्यता और शांति की सराहना करते हुए कहा कि यहाँ पहुँचकर केदारनाथ धाम की साक्षात आध्यात्मिक अनुभूति होती है। स्थानीय प्रबुद्धजनों ने शासन-प्रशासन और पर्यटन विभाग से इस ऐतिहासिक व पौराणिक स्थल को धार्मिक पर्यटन सर्किट से जोड़कर विकसित करने की मांग की है।
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